Monday, 31 March 2014

पहली बार नीलकंठ महादेव और ऋषिकेश

वैसे तो पहले से ही नीलकंठ महादेव और ऋषिकेश जाने के बारे में सोच रहा था , बस इंतजार था समय का। अभी शनिबार को ऑफिस से जल्दी छुट्टी हो जाने के कारण इसी दिन जाने का पूर्ण निस्चय किया। पिछली बार मै इन्हीं दिनों हरिद्वार तक तो गया था। इस बार ऋषिकेश तक जाने कि योजना थी। एक मित्र जी को फोन किया लेकिन समय न होने के कारण असमर्थता बता दी। फिलहाल अकेले ही निकलना पड़ा। मैंने यह तय किया था कि शनिबार कि शाम में साहिबाबाद से ट्रैन से चलकर हरिद्वार और ऋषिकेश घूमकर रबिबार रात तक बापस आ जायेंगे।




दिल्ली से ऋषिकेश के लिए शाम में एक ट्रैन चलती है। यह सुबह में ऋषिकेश पहुँचा देती है। मुझे भी इसी ट्रैन से जाना था। फिलहाल ५ बजे साहिबाबाद स्टेशन पर पहुँचे। साहिबाबाद एक छोटा स्टेशन है लेकिन दिल्ली से पास होने के कारण कई महत्वपूर्ण ट्रेनें यहाँ रूकती है। ट्रैन आने का समय ६ बजकर २० मिनट था। इसलिए अभी समय होने के कारण स्टेशन पर घूमे और कुछ फ़ोटो भी लिए।


६:२५ बजे ट्रैन प्लेटफॉर्म नंबर १ पर आयी। ट्रैन में उम्मीद से कम भीड़ थी। इसलिए आराम से शीट  मिल गयी।ट्रैन चल दी। सीधे ग़ाज़ियाबाद स्टेशन पर रुकी कुछ यात्री चढ़े। मेरे वाले डिब्बे में साथ में २ अन्य व्यक्ति भी ऋषिकेश ही जा रहे थे। थोड़ी बहुत बात शुरू हुई तो दिल्ली परिवहन से रिटायर्ड लोग निकले वे लोग नीलकंठ महादेव तक जा रहे थे।

ट्रैन भी मुरादनगर , मोदीनगर और मेरठ होते हुए रात में १० बजे मुज्जफरनगर पहुँची। मुज्जफरनगर\में चाय नास्ता और डिनर किया। ट्रैन भी ज्यादा लेट नही चल रही थी। इस ट्रैन के अगले ठहराव देवबंद , सहारनपुर, टपरी ,रूडकी ,लक्सर  होते हुए हरिद्वार और फिर रायवाला, वीरभद्र के बाद ऋषिकेश पहुंचती है इसके बारे में मुझे सहयात्रियों ने ही बताया। इस मार्ग पर चिनिमिले बहुत है। ऋषिकेश पहली बार जाने कि वजह से मन में काफी उत्साह था। अब धीरे धीरे नींद भी आ रही थी। जब ट्रैन सहारनपुर पहुँची तब आँख\खुली। सहारनपुर इस मार्ग पर मेरठ कि तरह एक मुख्य स्टेशन है। यहाँ पर करीब ट्रैन २५ मिनट रुकी। इसी बीच चाय पीने के बाद थोड़ी देर स्टेशन पर भी घूमें।

लाइन बदलने कि वजह से ट्रैन यहाँ से १२:३५ बजे चली। फिलहाल ट्रैन में सहयात्रियों से बाते होती रही। और ट्रैन लक्सर में काफी देर रुकने के बाद सुबहः ३:०० बजे हरिद्वार पहुँची। ज्यादातर यात्री हरिद्वार के ही थे इसलिए यहाँ से चलने के बाद ट्रैन बिलकुल खली हो गयी।जब साहिबाबाद से चले थे तो इतनी ठण्ड नही थी जितनी कि अब लग रही थी। हरिद्वार से चलने के बाद ४० मिनट के बाद ट्रैन आखिरकार ऋषिकेश स्टेशन पर पहुंची।



स्टेशन पर उतरकर पहाड़ों को काफी करीब से साफ़ महसूस किया जा सकता था। २ सहयात्री भी मेरे साथ ही थे वे लोग राम झूला जा रहे थे मुझे भी वहीं जाना था इसलिए स्टेशन के बाहर से राम झूला जाने वाले ऑटो में बैठकर करीब ४० मिनट बाद राम झूला पहुंचे। सच में क्या सुन्दर नज़ारा  था गंगा नदी के चारो और पहाड़ ही पहाड़। सुबह का समय होने के साथ ही हवा भी काफी तेज चल रही थी। अब आगे कि योजना यह थी कि कुछ देर बाद गंगा नदी में स्नान करने के बाद रामझूले पर ही चाय नास्ता करके सुबह में टेक्सी से नीलकंठ महादेव मंदिर जायेंगे। नीलकंठ  महादेव मंदिर के बारे में भी हमे दोनों सहयात्रियों से ही पता चला। मेरे लिए सच में यह एक नया अनुभव था।


सुबह में रामझूला पार करके स्वर्ग अश्रम पहुँचे।चाय पीने के बाद गंगा घाट पर स्नान किया और गंगाजल को भरकर नीलकंठ महादेव जाने कि तैयारी करने लगे। तब तक सुबह के ६ बज चुके थे। रामझूले के पास ही टैक्सी स्टैंड पर पहुंचे वहाँ कई टैक्सी खड़ी हुई थी कुछ प्राइवेट और कुछ शेयर्ड सभी के अलग अलग रेट थे।
फिलहाल १२० रूपए में दोनों और के लिए टेक्सी कर ली हमारे साथ अन्य ९ सवारियाँ भी थी। टैक्सी वालों से पता चला कि मंदिर यहाँ से करीब ३० किलोमीटर आगे है। पहले तो मुझे रेट ज्यादा लगे लेकिन वापसी में रामझूले पर आने तक ये रेट सही थे।

रामझूले से नीलकंठ महादेव मंदिर तक रोड बढ़िया बना हुआ है। और गाड़ियां मंदिर तक जाती हैं। हम लोग ८ बजे मंदिर पहुंचे दर्शन करने के बाद ९ बजे बापस राम झूला आये। इसी बीच मार्ग में कई जगह रिवर राफ्टिंग और कैंपिंग भी देखने को मिली और हाँ पहाड़ों पर छोटे छोटे गढ़वाली गाव देखने लायक थे। एक पहाड़ी हिरन भी दिखा।


रामझूला पहुँच कर हमारी योजना अब हरिद्वार जाने की थी। एक ऑटो में बैठकर ११ बजे हरिद्वार पहुंचे। टेम्पो से करीब ३५ रुपए किराया लगा। बीच में पहाड़ी सौंदर्य और एक नेशनल पार्क देखने योग्य था। हरिद्वार पहुँचकर गंगा स्नान किया। अमावस्या होने के कारन काफी भीड़ थी। कुछ देर स्टेशन रोड पर शॉपिंग भी की।




सायं में ३ बजे हमारी ट्रैन थी जिससे ग़ाज़ियाबाद वापस आना था यह हरिद्वार अहमदाबाद मेल रात में ९ बजे ग़ाज़ियाबाद पहुँचाती है। फिलहाल हरिद्वार में ही स्टेशन रोड पर एक होटल में लंच किया। स्टेशन पर टिकट लेने के बाद प्लॅटफॉर्म २ पर पहुंचे तब तक ट्रैन लग चुकी थी। ट्रैन में शीट मिल गयी और ३:२० बजे ट्रैन हरिद्वार से चल दी रूडकी , मेरठ रुकते हुए ट्रैन ९:१० बजे ग़ाज़ियाबाद पहुंची।

इस पूरे सफ़र में काफी अच्छा लगा और कई नई बातें सीखने को मिलीं। कुल मिलाकर यह मेरी अब तक कि सबसे अच्छी ट्रैन यात्रा रही।


No comments:

Post a Comment