Sunday, 19 October 2014

एक सफर दिल्ली मेट्रो के साथ

अभी कल की ही बात है । आफिस की छुट्टी होने के कारण कमरे पर मै और मेरा दोस्त मंजीत जोकि हमारे ही गृहजनपद शहीदों की नगरी शाहजहाँपुर  के रहने वाले हैं । हम लोग आपस में दूर के रिश्तेदार भी हैं । हम लोगों ने निश्च्य  किया कि आज मैट्रो रेल की यात्रा का लुत्फ उठाया जाये । अपनी योजना के अनुसार हम लोग लगभग दोपहर का भोजन करने के बाद दोपहर के लगभग साढ़े ग्यारह बजे मेट्रो सेक्टर  १५  नोएडा स्टेशन पर पहुंचे । चूँकि मेट्रो स्मार्ट कार्ड होने की वजह से स्टेशन पर कोई दिक्कत नहीं हुई और हम लोग ट्रेन का इंतज़ार करने लगे जोकि नॉएडा सिटी सेंटर से द्वारका की और जा रही थी । थोड़ी देर बाद ट्रैन प्लेटफॉर्म पर आ गयी और हम ट्रैन में चढ़ गए । चूँकि दिल्ली मेट्रो यातायात का सुबिधाजनक होने तथा समय की बचत के कारण इसमें हमेशा ही भीड़ रहती है। बहुत ही किस्मत अच्छी हो तो सीट पर बैठने का अवसर मिल सकता है अन्यथा सफर खड़े खड़े ही करना पड़ता है | 


फिलहाल ३० सेकंड बाद ट्रैन चल दी |अशोक नगर , अक्षरधाम, यमुना बैंक और प्रगति मैदान होते हुए लगभग ३० मिनट के बाद राजीव चौक स्टेशन पर पहुंची | एक महत्वपूर्ण स्टेशन होने के कारण हम लोगों के साथ लगभग मेट्रो ट्रैन से जितने यात्री उतरे उतने ही फिर सवार होकर द्वारका और रवाना हो गए । चूँकि हम लोगों को एम्स जाना था । जोकि यहाँ से येलो लाइन पर पर पड़ता है इसलिए हम लोगों को लाइन  बदलनी पड़ी | थोड़ी देर के बाद एम्स की और जाने  वाली मेट्रो ट्रेन आ गयी । जिन यात्रियों को राजीव चौक पर उतरना था वो पहले उतरे फिर  हम और हमारे साथ कुछ अन्य यात्री भी  चढ़े | ट्रैन चल दी और केन्द्रीय सचिवालय , पटेल चौक , रेसकोर्स , आईएनए  स्टेशनों से गुजरती हुई एम्स स्टेशन पर पहुँची | यहाँ तक भी हम लोगों को शीट ना मिलने  कारण खड़े होकर सफर करना पड़ा । 

लगभग १ बजे एम्स पहुंचे । तब तक एम्स के  डॉक्टरों का  ऑफिस से निकलने का समय हो गया था । चूँकि मेरे दोस्त को परामर्श  हेतु एक बरिष्ठ डॉक्टर राजेश सागर से मिलना था । एम्स (अखिल  भारतीय आयुर्विज्ञान  संस्थान ) भारत का  सबसे बड़ा अस्पताल है।  यहाँ पर देश-विदेश से  लोग इलाज कराने के लिए आते है । एम्स  की  स्थापना  एक अन्य देश के सहयोग से सं १९३२ में हुई थी ऐसा हमे वहाँ पर जाकर पता चला ।

एम्स से बाहर का एक दृश्य 

एक फोटो तो अपना भी 
एम्स का मुख्य द्वार 

समय बढ़ने के साथ साथ हम लोगों को हल्की भूख भी लगी इसलिए एम्स के कैफेटेरिया में जाकर कुछ जलपान किया । तत्पश्चात वहाँ से हम कुछ देर घूमने के बाद पुनः मेट्रो के द्वारा वापस राजीव चौक पर आये तब तक सायं के ५ बज रहे थे । अभी हम लोग और घूमना चाहते थे पास  कनॉट प्लेस 
है  जिसे दिल्ली का दिल कहा जाता है । 





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