Wednesday, 6 April 2016

एक बार फिर नैनीताल का सफर (Once again on the way to Nainital)

काफी समय से ब्लॉग पर पोस्ट लिखने के बारे में सोच रहा था । अपनी शादी और व्यस्तता की वजह से कब जनबरी, फरबरी और मार्च गुजर गया पता ही नहीं चला । चलिए आज आप को एक बार फिर नैनीताल के इस खूबसूरत सफर पर लिए चलते हैं ।  ६ फरबरी को शादी समारोह और अन्य कार्यों की वजह से फरबरी माह में ही अपनी श्रीमती जी के साथ इस बार नैनीताल जाने का संयोग बना । 

हालांकि मैं पहले भी एक बार नैनीताल जा चुका था इस बार पत्नी जी के कहने पर अकस्मात ही प्रोग्राम बन गया । दिनांक १८ फरबरी, दिन गुरुबार की सुबह को इस यात्रा सफर की शुरुआत हुई । ऑफिस से मैंने पहले ही २ दिन गुरुबार और शुक्रबार का अवकाश ले लिया था, शनिवार और रविवार साप्ताहिक छुट्टी होने की वजह से ४ दिन हमारे पास थे । फिलहाल बुधवार को रात्रि ड्यूटी करने के बाद सुबह ही गाज़ियाबाद से अवध असम एक्सप्रेस पकड़कर बरेली तक जाना पड़ा। दुर्भाग्य से उस दिन यह ट्रैन लगभग ३ घंटे की देरी से चल रही थी । उधर मेरी पत्नी जी का फ़ोन आ रहा था की किस समय तक आप बरेली पहुँचोगे । 

अचानक प्रोग्राम बनाने का सबसे बड़ा नुकसान सफर के दौरान होता है ।  पहले तो एक बार को वैष्णो देवी माँ के मंदिर जम्मूतवी  जाने का मन हुआ । लेकिन वहां फिर कभी जाने के इरादे से नैनीताल जाना ही उचित लगा । चलिए अब यात्रा बृत्तान्त पर आगे चलते है । ऑफिस से रात्रि ड्यूटी करने के बाद सुबह गाज़ियाबाद स्टेशन पहुंचे , अवध असम (गुवाहाटी  एक्सप्रेस ) ट्रैन ११:२५ मिनट पर आयी जिसका यहाँ पहुँचने का निर्धारित समय ८ बजकर ४५ मिनट था । ट्रैन में भीड़ तो थी लेकिन फिर भी हापुड़ से आगे ऊपर की बर्थ पर शीट मिलने से रात्रि में जगे होने की कारण नींद से काफी आराम मिला । मुरादाबाद और  रामपुर होते हुए ट्रैन करीब ४:१५ बजे सायं को बरेली पहुंची । मेरी पत्नी जी तब तक अपने भाई जी के साथ १५ मिनट पहले ही बाघ एक्सप्रेस से यहाँ पहुँच गयीं थीं । 



बरेली ट्रैन से उतरे अपनी श्रीमती जी से मुलाकात हुई और उन्हें आगे की  नैनीताल यात्रा के बारे में बताया । फिलहाल तो नैनीताल के साथ ही पूर्णागिरि मंदिर और टनकपुर भी जाना था । लेकिन फिर मेला शुरू ना होने की वजह से वहां नहीं जा पाए । अगली बार जब कभी जाना होगा तब आराम से जायेंगे । वैसे तो कई लोगों को पहले ही पता होगा फिर भी जानकारी के लिए बताते चले की बरेली में भी २ बस स्टैंड है एक पुराना बस स्टैंड और नया सैटेलाइट बस स्टैंड । हल्द्वानी और नैनीताल की और जाने वाली बसें पुराने बस स्टैंड से मिलती हैं। पुराने बस स्टैंड पहुंचे । किस्मत अच्छी थी हल्द्वानी जाने वाली बस लगी मिल गयी । तब तक सायं के लगभग ५ बज चुके थे । यहाँ से हल्द्वानी १३१ किलोमीटर है १०० - १०० रुपये के हिसाब से दो टिकट लेकर बस में शीट ली । इसी बीच चाय और कुछ जलपान भी कर लिया । 

मेरी श्रीमती जी के साथ में शादी के बाद यह पहली यात्रा थी और उनके लिए निसंदेह यह एक नया अनुभव था । सुबह के चले होने की वजह से हलकी थकान भी हो रही थी । लेकिन पत्नी जी का साथ होने के कारण हल्द्वानी तक कैसे पहुँच गए समय का पता ही नहीं चला । हाँ एक दो जगह जाम और सड़क करब होने की वजह से थोड़ा ज्यादा समय लगा । बरेली से किच्छा होते हुए सायं में करीब ८:३० बजे हल्द्वानी पहुंचे । मैं इससे पहले भी २ बार हल्द्वानी आ चूका था । फिलहाल बस स्टैंड के पास ही ७०० रुपये में एक कमरा लिया । रात्रि का भोजन करने के बाद अगले दिन के नैनीताल सफर के बारे में बातें करते कब नींद आ गई पता ही नहीं चला । 

सुबह ७ बजे आँख खुली फ्रेश होकर चाय नास्ता किया और ८ बजे चेकआउट करने के बाद नैनीताल जाने वाली बस का इंतज़ार करने लगे । कबीब २० मिनट बाद बस आई इसी भींच कुछ फोटो लिए । बस नैनीताल जा रही थी बस में शीट लेकर आराम से बैठ गए ।  बस से जाने वाले ज्यादातर यात्री नैनीताल और पास के कस्बे के थे । बस चल दी और धीरे धीरे दूर दिखने बाले पहाड़ अब बिल्कुल हमारे पास ही थे । काठगोदाम के आगे का नजारे  और प्राकृतिक सौंदर्य को शब्दों में वयां करना कठिन है इसे आप वहां जाकर की महसूस कर सकते हैं । करीब २ घंटे के सफर के बाद जियोलिकोट तिराहे से होकर अब हम नैनीताल में थे ।  फरबरी का महीना होने के कारण यहाँ का मौसम बहुत की सुहाना था ।  हल्द्वानी से नैनीताल के बीच पहाड़ी यात्रा सफर को आप इस लिंक से पढ़ सकते हैं । नैनीताल बस स्टैंड पहुंचे तब तक सुबह के १०:२ ० बज गए थे । बस से बहार आकर झील के पास माल रोड पर कुछ देर टहले फिर आराम करने के लिए झील के पास ही एक होटल में ८०० रूपए देकर रूम बुक किया । इस होटल का नाम होटल लेक व्यू (Hotel  Lake View ) है । झील के पास और माल रोड पर होने के कारण आप जब भी नैनीताल जाएँ तो इस होटल में रुक सकते है ।

चूँकि अभी सीजन की शुरुआत थी इसलिए उम्मीद से काफी काम भीड़ थी । कुछ देर होटल में रुक कर आराम और लंच किया । फिर नैनीताल घूमने की शुरुआत की । हम लोगों ने आज झील बोटिंग , नैना देवी मंदिर, रोपवे  लेक व्यू पॉइंट्स और नैनीताल चिड़ियाघर  का लुत्फ़ लिया ।  साथ ही कुछ देर माल रोड पर शॉपिंग भी की । तब तक सायं के ५ बज चुके थे । वापस होटल  पहुंचे ।  अब यहाँ से ही टनकपुर जाने का प्रोग्राम था लेकिन मेले की शुरुआत ना होने की वजह से वहां जाना नहीं हो सका । नैनीताल में ही रात्रि विश्राम और भोजन के बाद काफी अच्छी नींद आई और हिल स्टेशन होने की वजह से रात्रि में ठंड भी बढ़ गयी थी । अगले दिन नैनीताल के पास ही और काठगोदाम में घूमने के बाद, सायं में बाघ एक्सप्रेस ट्रैन थी । निर्धारित समय पर काठगोदाम रेलवे स्टेशन पहुँच गए । ट्रैन में आराम से सोते हुए कब वापस अपने गृह नगर शाहजहांपुर आ गए पता ही नहीं चला ।  सुबह ३ बजे ट्रैन शाहजहांपुर पहुंची वहां से ऑटो के द्वारा घर पहुंचे ।

पिछली बार की तरह इस बार भी यह यात्रा शानदार रही । इस यात्रा की सबसे खास बात झील में पहली बार बोटिंग और रोपवे स्नो व्यू पॉइंट  देखना रहा ।  लेकिन बारिश का मौसम न होने के कारण झरने ना देख पाने का अफ़सोस रहा ।
गाजियाबाद से चलते समय मौसम 




होटल से लिया गया फोटो 









रोपवे के अंदर से लिया गया फोटो 

lake व्यू पॉइंट 



नैनीताल ज़ू के अंदर 






































1 comment:

  1. Very nice nitin... Esa lag rha hai jese me khud hokar aa gyi waha se... ab mera man bahut jyada ho gya nainital jane ko

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