Thursday, 21 April 2016

चलो बुलाबा आया है : माँ वैष्णों देवी यात्रा ( Ma Vaishno Devi Yatra, Katra)

दिनांक : १४ अप्रैल , गुरुवार

वैसे तो इस यात्रा  की विधिवत शुरुआत कटरा, जम्मू से हुई । लेकिन मेरे लिए यह यात्रा १४ अप्रैल को ही शुरू हो गयी । पहले से पूर्व निर्धारित इस यात्रा का सबसे बड़ा फायदा इस यात्रा का सफलता पूर्वक संपन्न होना है ।

चलिए अब इस यात्रा सफर पर चलते हैं, १४ से १७ अप्रैल की ऑफिस से छुट्टी लेने के बाद १३ की सायं कालीन ड्यूटी करने के बाद, रात्रि ९ बजे ऑफिस से बाहर आकर सेक्टर ६२ से अपने घर जाने के लिए शहजहंपुर डिपो की बस का इंतज़ार करने लगे ।  किस्मत अच्छी थी की आनंदविहार बस स्टैंड नहीं जाना पड़ा और सेक्टर ६२ हाइवे से ही बस मिल गयी । मेरा अपनी पत्नी जी के साथ में अगले दिन यानि की १५ अप्रैल को सियालदह एक्सप्रेस से जम्मू का शाहजहांपुर से रिजर्वेशन था। इसीलिए एक दिन पूर्व ही अपने गृह जनपद जाना अनिवार्य था । फिलहाल बस मिली और भाग्य बस शीट भी, जो मेरे लिए प्रसन्नता की बात थी । ऑफिस करने की वजह से थकान भी आ रही थी और नींद भी । बस ५ मिनट रुकने के बाद चल दी । आगे हापुड़ पहुँचने से पहले ही घर पर आने की सूचना दे दी की सुबह तक आ जायेंगे । बस चलने के साथ साथ ठंडी हवा और खिड़की केपास शीट होने के कारण कब नींद आई पता ही नहीं चला । आँख जब खुली जब बस एक होटल पर रात्रि भोजन और जलपान के लिए रुकी । ३० मिनट रुकने के बाद बस चल दी और आगे मुरादाबाद, रामपुर और बरेली होते हुए सुबह के ६ बजे शाहजहांपुर पहुँच गए । पत्नी जी से बात हुई और शाहजहांपुर ही रुक गए । 



बिश्राम करने के बाद लगभग दोपहर १ बजे रेलवे स्टेशन रवाना हुए ।  ट्रैन का निर्धारित समय १:५३ मिनट था लेकिन यह ट्रैन ३ बजकर ४० मिनट पर ३ नंबर प्लेटफॉर्म पर आई । पहली बार जम्मू और कटरा होते हुए माता रानी के भवन जा रहे थे इसलिए मन में ख़ुशी के साथ साथ उत्साह भी था । ५ मिनट रुकने के बाद ट्रैन चल दी हम लोगों का जम्मू तक का रिजर्वेशन था इसलिए कोई दिक्कत नहीं हुई । और अपनी अपनी शीट पर बैठ कर आराम और कुछ  जलपान किया । फिर बातें करते हुए रात में १० बजे नींद आ गयी तब तक यह ट्रैन बरेली और मुरादाबाद होते हुए लक्सर के पास पहुँच चुकी थी । सुबह में जब ३:३० बजे आँख खुली तब मोबाइल से चेक किया  तो यह ट्रैन अम्बाला के पास थी । फिर धीरे धीरे पठानकोट, चक्की बैंक होते हुए सुबह के लगभग ९ बजे हम लोग जम्मूतवी पहुँच चुके थे । फ्रेश होकर कुछ फोटो लिए फिर स्टेशन से बाहर आकर कटरा जाने वाली बस की प्रतीक्षा करने लगे । जम्मू के बस स्टैंड लोकल बस से पहुंचे । काफी देर के बाद एक कटरा जाने वाली बस में शीट मिल गयी । सुबह गन्ने का रस और नारियल चिप्स का नास्ता भी बस में ही किया । बस चल दी पहाड़ों की गोद और ३ बेहद सुन्दर सुरंगों के बीच होती हुई बस एक तिराहे पर रुकी । इसी तिराहे से एक रास्ता कटरा होते हुए रिआसी जिले को चला जाता है और सीधे हाथ वाला रास्ता कश्मीर को जाता है । काफी मनोरम दृश्य था । 

करीब ११ बजे कटरा, जम्मू पहुँचे । नवरात्र का समय होने के कारण अच्छी खासी भीड़ थी । कटरा में बस स्टैंड पर बस रुकी । पास में ही  यात्रा पर्ची ऑफिस और जम्मू कश्मीर पर्यटन विभाग का रेस्ट हाउस और लॉकर भी है । फिलहाल बस से बाहर आते ही एक होटल एजेंट से बात हुई , थके होने की वजह से इसी होटल में रुकने का निस्चय किया । यह होटल कटरा की मैं मार्केट में थोड़ा सा अंदर था, टैक्सी सर्विस की वजह से हम लोग जल्दी ही होटल पहुँच गए । होटल पहुँचकर आराम करके सायं में माँ के दरवार जाने के लिए निस्चय किया । आपकी जानकारी के लिए बताते चलें की कटरा में स्थित वाणगंगा से भवन वैसे तो १४ किलोमीटर है लेकिन अर्धकुआरी के रास्ते यह करीब १२.५ किलोमीटर पड़ता है । वाणगंगा चेकपोस्ट पर यात्रा पर्ची चेक होती है यहाँ पर्ची लेने से ६ घंटे के अंदर पहुँचना होता है अन्यथा यात्रा पर्ची रद्द हो जाती है । वाणगंगा १. ५ किलोमीटर है । यहाँ से ही भवन के लिए चढ़ाई की विधिवत शुरुआत होती है । पैदल चलने के अलावा आप पालकी और घोड़े -खच्चरों की सवारी से भी अपनी सुविधा  अनुसार जा सकते हैं । 


हम लोग फिलहाल रेस्ट करने के बाद टैक्सी से ही यात्रा पर्ची लेने के उपरांत करीब ६ बजे वाणगंगा चेकपोस्ट पहुंचे । अच्छी खासी भीड़ थी २०  मिनट लाइन में लगने के बाद पैदल ही  करीब ६:३० बजे सायं को चढाई शुरू कर दी । क्या खूबसूरत दृश्य था चारो और सजी दुकानें, माँ के जयकारे लगाते हुए भक्त, ऊँचे ऊँचे सुन्दर पहाड़ पालकी, पैदल और घोड़े खच्चरों से माँ के भवन जाते हुए भक्त और भी बहुत कुछ सच में बड़ा ही मनोरम दृश्य था ।  आप यहाँ पहुँचकर ही इन सभी दृश्यों को महसूस कर सकते हैं । चलिए यात्रा सफर पर आगे चलते हैं ४ घंटे की कठिन चढ़ाई के बाद चरणपादुका होते हुए हम लोग अर्धकुआरी पहुंचे । यहाँ से भवन तक जाने के लिए २ रास्ते हो जाते है । एक पैदल, पालकी और इ-रिक्सा से जाने वाले यात्रियों की लिए और एक रास्ता घोड़े-खच्चरों से जाने वाले यात्रियों के लिए जो थोड़ा लम्बा और कठिन चढ़ाई युक्त है ।  यहाँ पहुँचने तक रास्ते में कई जगह विश्राम भी किया और नास्ता भी । 


अब आगे का सफर थोड़ा सा आसान हो जाता है क्यूंकि अब खड़ी चढ़ाई नहीं है । ३० मिनट यहाँ पर विश्राम करने के बाद चलते हुए हिमकोटी होते हुए १२ बजे के आसपास लगभग माँ के भवन के पास पहुँचे । लाइन में लगकर प्रसाद  और भवन में पहुँचने के लये ग्रुप नंबर भी लिया । यहाँ से भी भवन करीब १ किलोमीटर रह जाता है । जयकारे लगते हुए १ बजे भवन पहुंचे, भक्तों की लम्बी लाइन के बीच आखिरकर सुबह १ बजे वैष्णों माँ के दिव्य गुफा में स्थित माँ के दर्शन किये । भवन से वापस आये तब तक काफी थकन भी हो गयी थी और नींद के साथ ही ठण्ड भी लगने लगी । माँ के भवन में दर्शन करने के बाद भैरों मन्दिर भी जाना होता है । हम लोगों ने यहाँ से घोड़े की मदद से भैरों मन्दिर जाने का विचार किया और १ घंटे के बाद भैरों मन्दिर पहुँचे ।  भवन की तरह यहाँ भी भक्तों की अच्छी खासी भीड़ थी । थोड़ी देर रुकने के बाद फिर वापस अर्धकुआरी पर रुकने का निर्णय लिया । भैरों मन्दिर से अर्धकुआरी तक ढलान धर उतराई का रास्ता है और यह सफर बड़ी आसानी से किया जा सकता है । हम लोग अर्धकुआरी से पहले ही एक जगह सांझी छत पड़ती है वही रुक गए । माँ वैष्णों देवी श्राइन बोर्ड के कम्बल वितरण ऑफिस से कम्बल लेकर वहीँ पास में ही सो गए । सांझी छत हैलीपैड भी है कटरा से हेलीकाप्टर से सीधे यहाँ आया जा सकता है, यहाँ से भवन भी केवल २. ५ किलोमीटर ही है। 


थके होने की वजह से अच्छी नींद आई और आँख सीधे सुबह  ६ बजे के बाद खुली । तब तक उजाला हो गया था । यहाँ से १० मिनट के बाद चल दिए और ७:३० बजे अर्धकुआरी पहुँचे । सुबह होने की वजह से रस्ते में कई जगह कई सारे बन्दर भी मिले । अर्धकुआरी में नास्ता करने के बाद ८ बजे फिर कटरा के लिए फिर वापस चल दिए । २ घंटे की उतराई के बाद आखिरकर १० बजे बाणगंगा वापिस आ गए । तब तक अच्छी खासी धूप हो गयी थी और पैरों में थकान भी । बाणगंगा से पहले ही कुछ शॉपिंग भी की और नास्ता भी किया । वाणगंगा से प्राइवेट ऑटो द्वारा १५० रुपये किराया देते हुए वापिस रूम पर आये । इतनी थकान हो गई थी की बस अब सोने की इच्छा थी २ घंटे रेस्ट किया और १ बजे होटल से चेकआउट भी करके लंच करने के बाद  जम्मू कश्मीर पर्यटन विभाग के रेस्ट हाउस पहुंचे । सायं ७ बजे बस से चंडीगढ़ तक वोल्वो बस का रिजर्वेशन था । तब तक यही विश्राम किया और बस से ही वापस चंडीगढ़ के लिए रवाना हुए, रात को कब नींद आ गयी पता ही नहीं चला और आँख सीधे चंडीगढ़ पहुंचकर ही खुली । 


चलिए अब फोटो के माध्यम से  इस यात्रा  सफर पर चलते हैं :-

सुबह पठानकोट स्टेशन के पास 
दूर से दिखता जम्मू 


लो जी भई , जम्मू पहुँच गए 
यही है वो तिराहा , जहाँ से दाएं हाथ वाला रास्ता कश्मीर और बाए हाथ वाला कटरा को जाता है। 







वाणगंगा चेकपोस्ट से आगे 









अगले भाग में जारी 


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