Wednesday, 4 May 2016

चण्डीगढ़ यात्रा : (Chandigarh Trip)

इस यात्रा सफर को शुरू से पड़ने के लिए क्लिक करें 

१७ अप्रैल , रविवार 
जैसा की पिछली पोस्ट में आपने पढ़ा कि सायं ७ बजे हम कटरा से बस से रवाना हुए और नींद की वजह से आँख सीधे सुबह चंडीगढ़ बस स्टैंड पर खुली । यहाँ रुकने के लिए रेलवे स्टेशन के पास ही होटल में रिजर्वेशन था और अगले दिन दिल्ली जाने के लिए भी रिजर्वेशन । इसलिए आज का पूरा दिन हमारे पास घूमने के लिए था । बस से उतरे कई ऑटो वाले मिल गए एक से बात हुई होटल तक जाने के लिए १५० रूपए देकर सुबह ६:१० बजे होटल पहुंचे । रिसेप्शन पर २ ही बन्दे थे एक भी हलकी नींद में था । अपना ऑनलाइन रिजर्वेशन दिखाया चेक किया कहने लगा की आप जल्दी चेक इन कर रहे हैं उसका कुछ चार्ज अलग से देना होगा । हाँ कहते हुए आखिरकर रूम में पहुँचे, फ्रेश हुए और फिर रेस्ट किया । होटल में ही ब्रेकफास्ट भी शामिल था इसलिए दोपहर में चाय के साथ ब्रेकफास्ट भी कर लिया । होटल की सर्विस और रूम दोनों ही अच्छी थीं । फिलहाल तब तक २ बज गए थे अब समय था चंडीगढ़ घूमने का । मैंने आज का दिन सुखना झील, रॉक गार्डन और rose गार्डन देखने के लिए निश्चित किया था । 

२ बजे रूम से बाहर आये, काफी तेज़ धूप थी एक प्राइवेट ऑटो वाले से बात की १०० रूपए देकर सुखना झील पहुँचे, सच में इस झील को चंडीगढ़ की प्राकृतिक खूबसूरती कह सकते हैं । काफी अच्छा लगा । अंदर पहुँचकर कुछेक फोटो लिए और झील भ्रमण भी किया । कुछ लोग झील में बोटिंग भी कर रहे थे और कुछ लोग झील के पास ही टहल रहे थे  । झील परिसर में ही जलपान की अच्छी व्यवस्था है, साथ ही बच्चों के खेलने के लिए ही झूले भी हैं । झील के पीछे ही एक पर्वत श्रृंखला दिखायी देती है । मैंने एक स्थानीय व्यक्ति से इस बारे में पूंछा तो उसने बताया की इस झील के आगे वाले पहाड़ चंडीगढ़ से कालका होते हुए शिमला जाते समय दिखाई देते है । झील के पास में ही स्पोर्ट्स काम्प्लेक्स भी है जो केवल स्टाफ के लिए है । हम लोगों ने कुछ पोटो लिए और जूस आदि नास्ता करने के बाद फिर पास में ही स्थित रॉक गार्डन के लिए चल दिए । 


ऑटो से रॉक गार्डन पहुँचे सुखना झील की तरह यह भी चण्डीगढ़ की ऐतिहासिक विरासत है । यह गार्डन श्री नेकचन्द सैनी का बनाया हुआ है। कहते हैं कि उन्होने अपना शौक पूरा करने के लिये चुपचाप इसे बनाना शुरू कर दिया। अगर आप यहां गये होंगे तो आपको तो मालूम ही है; अगर नहीं गये तो भविष्य में नेकचन्द के ’किले’ और उनकी  ’फौज’ को देखने के लिए अवश्य जाएँ । फिलहाल पहुँचकर कुछेक फोटो भी लिए । दिन में तेज़ धूप होने की वजह और समय के अभाव की वजह से रॉक गार्डन ही घूमना हो पाया और rose गार्डन अगली बार के लिए रह गया । शाम भी हो गयी थी । अगली बार जब चंडीगढ़ आएंगे तब  rose गार्डन और पिंजौर गार्डन को देख जाएगा । ऑटो से ही वापस होटल रूम पहुँचे तब तक शाम के ६ बज गए थे । 

अगले दिन ट्रैन से रिजर्वेशन था, कैंसिल करके अब चंडीगढ़ से बस से ही दिल्ली जाने का मन करने लगा था । रूम पर  आकर सामान पैक करके चेक आउट किया और सीधे पहुँच गए सतारा यानि की सत्रह सेक्टर के बस स्टैंड जहाँ से गुडगाँव, हरियाणा और दिल्ली की बसें मिलती हैं । बस स्टैंड पर ही नास्ता किया और दिल्ली का टिकट भी यहीं बस की वजाय स्टैंड से ही मिल गया । शीट भी कन्फर्म २५-२६ नंबर । चंडीगढ़ से आने वाली बसें दिल्ली के कश्मीरी गेट बस स्टैंड पर पहुंचती हैं । फिलहाल साम होने लगी थी बस चल दी कटरा के बाद अब चंडीगढ़ को भी वाय वाय कहते हुए अलविदा किया । यहाँ से बस चलकर कुरुछेत्र , अम्बाला केंट , करनाल होते हुए सीधे पानीपत के एक होटल बस स्टैंड पर रुकी ।  यहाँ डिनर किया । यहाँ से चलने के बाद जब आँख खुली तब तक दिल्ली पहुँच चुके थे । कश्मीरी गेट के पास ही बाहर से एक प्राइवेट ऑटो मिल गया । तब तक रात्रि के १२:३० बज चुके थे । ३५० रूपए किराया देकर करीब १ घंटे बाद अपने नॉएडा स्थित फ्लैट पर पहुँचे । 

चंडीगढ़ शहर की सबसे अच्छी बात लगी वहां की सड़के, शांत वातावरण और व्यवस्थित वसा हुआ शहर । कुल मिलकर माँ वैष्णों देवी और चण्डीगढ़ की यह संयुक्त यात्रा अच्छी रही । थकान भी हुई कई राज्यों से होकर गुजरना पड़ा और सफर में कई सहयात्रियों से भी परिचय हुआ । जिससे यह सफर और शानदार हो गया । 

चंडीगढ़ की इस यात्रा के कुछेक फोटो इस प्रकार हैं:-


 
चण्डीगढ़ की सड़के

पहुँच गए सुखना झील
सुखना झील का एक दृश्य

परिसर में स्थित दुकानें






रॉक गार्डन की खूबसूरती




चण्डीगढ़ स्थित बस स्टैंड

समाप्त । 

2 comments:

  1. Wonderful...!! each and every article and picture.
    Just know about your blog, got the link and go through all that.
    Really, its amazing.

    ReplyDelete