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नोएडा से श्री रेणुका जी झील स्कूटी यात्रा (Noida to Sri Renuka Ji Lake Scooty Trip) Part-1

Part-1

शनिवार (7th March 2026) की सुबह थी। घड़ी में सुबह के 7 बजने वाले थे। मौसम में हल्की ठंडक थी, सूरज धीरे-धीरे आसमान में अपनी रोशनी बिखेर रहा था और मन कई दिनों से पहाड़ों की ओर निकलने को बेचैन था।

काफी समय से ऑफिस और रोजमर्रा की भागदौड़ में फंसे रहने के कारण कोई स्कूटी यात्रा नहीं हो पाई थी। लेकिन आज  सुबह बिना ज़्यादा सोच-विचार के हेलमेट पहना, स्कूटी स्टार्ट की और फैसला कर लिया,

आज मंज़िल होगी हिमाचल प्रदेश की पवित्र "श्री रेणुका जी झील"।

सुबह-सुबह शहर अभी पूरी तरह जागा भी नहीं था। सड़कें लगभग खाली थीं और ठंडी हवा चेहरे से टकराकर एक अलग ही सुकून दे रही थी। सबसे पहले अपनी एक्टिवा स्कूटी में पेट्रोल भरवाया क्योंकि लंबा सफर था और रास्ते में किसी परेशानी का जोखिम नहीं लेना था। फिर सेक्टर 62 से निकलकर NH-24 पर सफर शुरू हुआ। आगे लेफ्ट कट से हाईवे हुए मेरठ जाने वाले एक्सप्रेस वे पर आ गए | तब तक सुबह के लगभग ९ बज चुके थे |  यहीं से असली रोड ट्रिप का एहसास होने लगा। सामने लंबी सड़क, हल्का ट्रैफिक और मन में नई जगह देखने का उत्साह।

मेरठ एक्सप्रेसवे से आगे बढ़ते हुए रास्ता बदलकर गंगा कैनाल रोड की ओर मुड़ गए। यह मार्ग एक्सप्रेसवे जितना चौड़ा भले न हो, लेकिन इसकी सबसे बड़ी खूबी है—कम ट्रैफिक और प्राकृतिक दृश्य। पूरे रास्ते गंगा नहर साथ-साथ बहती रही। कभी चमकता हुआ पानी, कभी हरियाली और कभी छोटे-छोटे गांव। ऐसा लग रहा था जैसे सड़क नहीं, बल्कि प्रकृति के बीच से गुजर रहे हों। हालांकि इस मार्ग पर कई स्पीड ब्रेकर अचानक सामने आ जाते हैं, इसलिए यहां सावधानी से वाहन चलाना बेहद जरूरी है।

रोड ट्रिप का मज़ा तब तक अधूरा रहता है, जब तक किसी ढाबे पर रुककर गरमा-गरम नाश्ता न किया जाए।करीब 10 बजे एक छोटे से ढाबे पर स्कूटी रोकी। सामने ताज़े आलू के परांठे और मिट्टी की खुशबू वाली गर्म चाय।यात्रा में ऐसे छोटे-छोटे पड़ाव ही असली यादें बनाते हैं।

जैसे-जैसे दोपहर होने लगी, सुबह की ठंडक धीरे-धीरे गर्मी में बदलने लगी। सहारनपुर की ओर बढ़ते हुए बड़े-बड़े उद्योग, खेत और शहर की हलचल दिखाई देने लगी। रास्ते में मोबाइल चार्जर होल्डर खराब हो गया। मजबूरी में नया लगवाना पड़ा, जिससे कुछ समय जरूर खराब हुआ, लेकिन लंबी यात्रा में ऐसे छोटे-छोटे अनुभव भी सफर का हिस्सा होते हैं। 

सहारनपुर पार करने के बाद जैसे ही हथनीकुंड बैराज पहुँचे, पूरा दृश्य बदल गया। यमुना नदी पर बना यह विशाल बैराज इंजीनियरिंग का शानदार उदाहरण है। दोनों तरफ फैला पानी, चौड़ी सड़क और शांत वातावरण कुछ देर रुककर इस जगह को महसूस करने पर मजबूर कर देता है। यदि आप इस मार्ग से गुजर रहे हैं, तो यहाँ कुछ मिनट का ब्रेक जरूर लें।

बैराज पार करते ही सड़क जंगलों में प्रवेश करने लगी। कालेश्वर फॉरेस्ट रिजर्व की हरियाली, ऊँचे पेड़ और शांत वातावरण ऐसा एहसास दिलाते हैं जैसे आप किसी नेशनल पार्क के बीच से गुजर रहे हों। रास्ते में "Elephant Crossing Area" का बोर्ड देखकर रोमांच और बढ़ गया। यह पूरा हिस्सा यात्रा का सबसे खूबसूरत और यादगार हिस्सा लगा।

कुछ ही देर बाद वह पल भी आ गया जिसका सुबह से इंतजार था— "Welcome to Himachal Pradesh." सीमा पार करते ही मौसम बदल गया। दूर-दूर तक फैले पहाड़, घुमावदार सड़कें और ठंडी हवा ने सारी थकान खत्म कर दी। 

गूगल मैप भले ही रेणुका जी झील सिर्फ 12 किलोमीटर बता रहा था, लेकिन यह पूरी यात्रा का सबसे चुनौतीपूर्ण हिस्सा निकला। पत्थरों से भरी सड़क, मिट्टी, धूल और कई जगह टूटी हुई रोड। स्कूटी मुश्किल से 15–20 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चल पा रही थी। यही वह पल था जब समझ आया कि पहाड़ दूरी से नहीं, रास्तों से मापे जाते हैं।

शाम करीब 5:30 बजे रेणुका जी झील के पास पहुँच गये | स्कूटी झील परिसर में ही पार्किंग में लगा दी, कोई चार्ज नहीं लगा  | कुछ लोकल लोग यहाँ इवनिंग वाक कर रहे थे |  पहाड़ों के बीच इस झील के शांत पानी का विशाल फैलाव बहुत सुन्दर लग रहा जिन्हे शब्दों में वयां करना मुश्किल है | ऐसा लग रहा था जैसे प्रकृति ने अपने सबसे सुंदर रंग यहीं बिखेर दिए हों। शाम का समय होने के कारण भीड़ भी कम थी और पूरा वातावरण बेहद शांत था। 

श्री रेणुका जी झील परिसर में प्रवेश करते ही महसूस हुआ कि यह सिर्फ एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि आस्था और प्रकृति का अद्भुत संगम है। इस परिसर में झील के साथ और मंदिर भी हैं -

  • माँ रेणुका मंदिर
  • भगवान परशुराम ताल
  • दशावतार मंदिर
  • प्रसाद की दुकानें
  • साफ-सुथरा परिसर

सब कुछ बेहद व्यवस्थित और शांत था।  झील का पानी इतना साफ था कि अंदर तैरती बड़ी-बड़ी मछलियाँ साफ दिखाई दे रही थीं। यहाँ आने वाले श्रद्धालु उन्हें आटा और दाना खिलाते हैं, जो इस जगह के आकर्षण को और बढ़ा देता है। 

पूरे दिन लगभग 400 किलोमीटर से अधिक स्कूटी चलाने के बाद शरीर पूरी तरह थक चुका था। झील के सामने ददऊ गाँव में एक होटल मिल गया। बालकनी वाला साफ-सुथरा कमरा, गीजर, अटैच बाथरूम और पहाड़ों का सुंदर दृश्य— सिर्फ ₹500 में। होटल में ही कुछ देर आराम करने के बाद डिनर किया तब तक ९ बज गए थे, क्यंकि पहाड़ों में बाजार जल्दी ही बंद हो जाते हैं |  दिन भर थकन होने के कारण जल्दी ही नींद आ गयी | उम्मीद करते हैं इस यात्रा का यह पहले भाग आपको पसंद आया होगा, बाकि यात्रा वीडियो नीचे हैं, आप वहां से देख सकते हैं, मिलते हैं जल्द ही अगले भाग में ---