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श्री रेणुका जी से नोएडा तक स्कूटी यात्रा ( Sri Renuka Ji to Noida Scooty Trip) Part-2

यात्रा के पिछले देखा की श्री रेणुका झील और मंदिर दर्शन के बाद, मैंने पास में ही होटल ले लिया था | अब आगे ----

कभी-कभी किसी यात्रा का सबसे खूबसूरत हिस्सा मंज़िल नहीं, बल्कि उसकी सुबह होती है।

सुबह के लगभग 6:30 बजे नींद खुली, जब होटल की बालकनी का दरवाज़ा खोला, तो सामने फैली पहाड़ों की हरियाली, हल्की धुंध और उगते सूरज की सुनहरी किरणें किसी पोस्टकार्ड जैसी लग रही थीं। नीचे ददोऊ गांव का  छोटा-सा बस स्टैंड, हिमाचल रोडवेज़ की पहली बस और चारों ओर फैली शांति काफी सुन्दर दृश्य था, जिसे कैमरा कैद तो कर सकता है, लेकिन बिना वहाँ जाये महसूस नहीं किया जा सकता है ।

यही वह पल था जब लगा कि यात्रा का दूसरा दिन भी पहले दिन जितना ही खास होने वाला है।

अक्सर लोग श्री रेणुका झील घूमकर वापस लौट जाते हैं, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि यहां से मात्र 5–6 किलोमीटर की दूरी पर एक बेहद खूबसूरत जगह मौजूद है—जटाम डैम। रास्ता थोड़ा उबड़-खाबड़ था, लेकिन जैसे ही डैम के पास पहुँचे, सारी थकान गायब हो गई। शांत पानी, चारों तरफ पहाड़, उगता हुआ सूरज और दूर पहाड़ी पर दिखता मंदिर—यह दृश्य किसी फिल्म से कम नहीं था।

अगर आप भी श्री रेणुका जी की यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो इस जगह को अपनी सूची में ज़रूर शामिल करें।

यह जानकर राहत मिली कि श्री रेणुका जी जैसे छोटे कस्बे में भी यात्रियों के लिए अच्छी सुविधाएँ उपलब्ध हैं।

  • होटल और होमस्टे आसानी से मिल जाते हैं।
  • पेट्रोल पंप भी मौजूद है।
  • बजट के अनुसार रुकने के कई विकल्प उपलब्ध हैं।

इसलिए यदि आप बाइक या स्कूटी से यात्रा कर रहे हैं, तो रहने या ईंधन की चिंता करने की जरूरत नहीं है।

जब जटाम डैम से वापस आ रहे थे तो रस्ते में ही पेट्रो पम्प पड़ता है, जहाँ से स्कूटी फुल टैंक करा ली | क्योंकि  आज ही वापस नॉएडा भी पहुंचना था |  अब तक सुबह के ८ बज गए थे | इस बार वापस अलग मार्ग  नाहन होते हुए का विचार किया | 

यात्रा का अगला पड़ाव था नाहन।

स्थानीय लोगों और अपने अनुभव के आधार पर एक बात स्पष्ट हुई—

यदि आप श्री रेणुका जी जा रहे हैं या वापस आ रहे हैं , तो नाहन वाला मार्ग चुनें।

पहले दिन पांवटा साहिब वाले रास्ते से आने पर सड़कें काफी खराब मिली थीं, जबकि नाहन की ओर जाने वाली सड़कें अधिक आरामदायक और खूबसूरत थीं। रास्ते में हर मोड़ पर पहाड़, घाटियां और जंगल यात्रा को और यादगार बनाते रहे। करीब डेढ़ घंटे बाद नाहन पहुँचना हुआ। यह शहर साफ-सुथरा, व्यवस्थित और शांत लगा। सड़कें अच्छी थीं, ट्रैफिक नियंत्रित था और सुबह का चाय नाश्ता भी यहीं किया गया।

जैसे-जैसे पहाड़ पीछे छूटते गए, रास्ता मैदानों में बदलने लगा। काला अंब, जगाधरी और कुरुक्षेत्र होते हुए यात्रा आगे बढ़ी। आगे  का सफर  काफी आरामदायक रहा। कुछ ही देर में पंजाब और हरियाणा के विशाल गेहूं के खेत दिखाई देने लगे। दूर-दूर तक फैली हरियाली इस बात का एहसास करा रही थी कि भारत का हर इलाका अपनी अलग खूबसूरती समेटे हुए है। 

एक छोटी-सी गलती, जो बड़ी परेशानी बन सकती थी

यात्रा लगभग सामान्य चल रही थी, तभी अचानक स्कूटी बीच रास्ते में बंद हो गई। पहले लगा कि शायद कोई बड़ी तकनीकी खराबी आ गई है, लेकिन पास के मैकेनिक ने इंजन ऑयल चेक किया तो पता चला कि ऑयल लगभग खत्म हो चुका था। किस्मत अच्छी थी  पास  में ही मैकेनिक की शॉप मिल गयी, स्कूटी में इंजन ऑयल बिलकुल बिल्कुल भी नहीं बचा था, सिर्फ ₹300 का इंजन ऑयल डालने के बाद स्कूटी तुरंत स्टार्ट हो गई। उस समय यह एहसास हुआ कि यदि थोड़ी और लापरवाही होती, तो इंजन सीज़ भी हो सकता था।

यह अनुभव हर बाइक और स्कूटी राइडर के लिए एक महत्वपूर्ण सीख है—

लंबी यात्रा से पहले इंजन ऑयल, टायर, ब्रेक और सर्विस की पूरी जांच जरूर करें। 

करनाल में रुककर लंच किया और सिर्फ ₹20 में एक अच्छी चाय पी, जिसने पूरे सफर की थकान कम कर दी। आगे मुरथल के पास गन्ने का रस पीकर एक छोटा-सा ब्रेक लिया। लंबी रोड ट्रिप में ऐसे छोटे विराम सफर को और भी सुखद बना देते हैं। शाम करीब 4:50 बजे नोएडा में प्रवेश हुआ और कुछ ही मिनटों बाद यह लंबी लेकिन यादगार स्कूटी यात्रा अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच गई।

यात्रा से मिली सबसे बड़ी सीख

इस पूरी यात्रा ने सिर्फ नए स्थान नहीं दिखाए, बल्कि कई बातें भी सिखाईं—

  • सुबह जल्दी निकलने का अपना अलग ही आनंद है।
  • मुख्य पर्यटन स्थलों के आसपास छिपी जगहें भी जरूर देखें।
  • पहाड़ों में जल्दबाज़ी नहीं, धैर्य सबसे बड़ा साथी है।
  • वाहन की नियमित जांच लंबी यात्रा के लिए बेहद जरूरी है।
  • सफर का असली आनंद मंज़िल से ज्यादा रास्तों में छिपा होता है।

यदि आप भी श्री रेणुका जी जा रहे हैं, तो ये बातें याद रखें

  • जटाम डैम ज़रूर जाएँ।
  • नाहन वाला मार्ग चुनें।
  • सुबह जल्दी यात्रा शुरू करें।
  • स्कूटी, कार या बाइक का इंजन ऑयल पहले ही चेक कर लें।
  • रास्ते में छोटे-छोटे ब्रेक लेते रहें।
  • प्रकृति का आनंद लें और जंगलों में स्वच्छता तथा आग से सुरक्षा का ध्यान रखें।
आशा करते हैं आपको ये यात्रा सफर अच्छा लगा होगा, मिलते हैं एक और नए सफर साथ |  यात्रा वीडियो नीचे है आप वहाँ से देख सकते हैं-







नोएडा से श्री रेणुका जी झील स्कूटी यात्रा (Noida to Sri Renuka Ji Lake Scooty Trip) Part-1

Part-1

शनिवार (7th March 2026) की सुबह थी। घड़ी में सुबह के 7 बजने वाले थे। मौसम में हल्की ठंडक थी, सूरज धीरे-धीरे आसमान में अपनी रोशनी बिखेर रहा था और मन कई दिनों से पहाड़ों की ओर निकलने को बेचैन था।

काफी समय से ऑफिस और रोजमर्रा की भागदौड़ में फंसे रहने के कारण कोई स्कूटी यात्रा नहीं हो पाई थी। लेकिन आज  सुबह बिना ज़्यादा सोच-विचार के हेलमेट पहना, स्कूटी स्टार्ट की और फैसला कर लिया,

आज मंज़िल होगी हिमाचल प्रदेश की पवित्र "श्री रेणुका जी झील"।

सुबह-सुबह शहर अभी पूरी तरह जागा भी नहीं था। सड़कें लगभग खाली थीं और ठंडी हवा चेहरे से टकराकर एक अलग ही सुकून दे रही थी। सबसे पहले अपनी एक्टिवा स्कूटी में पेट्रोल भरवाया क्योंकि लंबा सफर था और रास्ते में किसी परेशानी का जोखिम नहीं लेना था। फिर सेक्टर 62 से निकलकर NH-24 पर सफर शुरू हुआ। आगे लेफ्ट कट से हाईवे हुए मेरठ जाने वाले एक्सप्रेस वे पर आ गए | तब तक सुबह के लगभग ९ बज चुके थे |  यहीं से असली रोड ट्रिप का एहसास होने लगा। सामने लंबी सड़क, हल्का ट्रैफिक और मन में नई जगह देखने का उत्साह।

मेरठ एक्सप्रेसवे से आगे बढ़ते हुए रास्ता बदलकर गंगा कैनाल रोड की ओर मुड़ गए। यह मार्ग एक्सप्रेसवे जितना चौड़ा भले न हो, लेकिन इसकी सबसे बड़ी खूबी है—कम ट्रैफिक और प्राकृतिक दृश्य। पूरे रास्ते गंगा नहर साथ-साथ बहती रही। कभी चमकता हुआ पानी, कभी हरियाली और कभी छोटे-छोटे गांव। ऐसा लग रहा था जैसे सड़क नहीं, बल्कि प्रकृति के बीच से गुजर रहे हों। हालांकि इस मार्ग पर कई स्पीड ब्रेकर अचानक सामने आ जाते हैं, इसलिए यहां सावधानी से वाहन चलाना बेहद जरूरी है।

रोड ट्रिप का मज़ा तब तक अधूरा रहता है, जब तक किसी ढाबे पर रुककर गरमा-गरम नाश्ता न किया जाए।करीब 10 बजे एक छोटे से ढाबे पर स्कूटी रोकी। सामने ताज़े आलू के परांठे और मिट्टी की खुशबू वाली गर्म चाय।यात्रा में ऐसे छोटे-छोटे पड़ाव ही असली यादें बनाते हैं।

जैसे-जैसे दोपहर होने लगी, सुबह की ठंडक धीरे-धीरे गर्मी में बदलने लगी। सहारनपुर की ओर बढ़ते हुए बड़े-बड़े उद्योग, खेत और शहर की हलचल दिखाई देने लगी। रास्ते में मोबाइल चार्जर होल्डर खराब हो गया। मजबूरी में नया लगवाना पड़ा, जिससे कुछ समय जरूर खराब हुआ, लेकिन लंबी यात्रा में ऐसे छोटे-छोटे अनुभव भी सफर का हिस्सा होते हैं। 

सहारनपुर पार करने के बाद जैसे ही हथनीकुंड बैराज पहुँचे, पूरा दृश्य बदल गया। यमुना नदी पर बना यह विशाल बैराज इंजीनियरिंग का शानदार उदाहरण है। दोनों तरफ फैला पानी, चौड़ी सड़क और शांत वातावरण कुछ देर रुककर इस जगह को महसूस करने पर मजबूर कर देता है। यदि आप इस मार्ग से गुजर रहे हैं, तो यहाँ कुछ मिनट का ब्रेक जरूर लें।

बैराज पार करते ही सड़क जंगलों में प्रवेश करने लगी। कालेश्वर फॉरेस्ट रिजर्व की हरियाली, ऊँचे पेड़ और शांत वातावरण ऐसा एहसास दिलाते हैं जैसे आप किसी नेशनल पार्क के बीच से गुजर रहे हों। रास्ते में "Elephant Crossing Area" का बोर्ड देखकर रोमांच और बढ़ गया। यह पूरा हिस्सा यात्रा का सबसे खूबसूरत और यादगार हिस्सा लगा।

कुछ ही देर बाद वह पल भी आ गया जिसका सुबह से इंतजार था— "Welcome to Himachal Pradesh." सीमा पार करते ही मौसम बदल गया। दूर-दूर तक फैले पहाड़, घुमावदार सड़कें और ठंडी हवा ने सारी थकान खत्म कर दी। 

गूगल मैप भले ही रेणुका जी झील सिर्फ 12 किलोमीटर बता रहा था, लेकिन यह पूरी यात्रा का सबसे चुनौतीपूर्ण हिस्सा निकला। पत्थरों से भरी सड़क, मिट्टी, धूल और कई जगह टूटी हुई रोड। स्कूटी मुश्किल से 15–20 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चल पा रही थी। यही वह पल था जब समझ आया कि पहाड़ दूरी से नहीं, रास्तों से मापे जाते हैं।

शाम करीब 5:30 बजे रेणुका जी झील के पास पहुँच गये | स्कूटी झील परिसर में ही पार्किंग में लगा दी, कोई चार्ज नहीं लगा  | कुछ लोकल लोग यहाँ इवनिंग वाक कर रहे थे |  पहाड़ों के बीच इस झील के शांत पानी का विशाल फैलाव बहुत सुन्दर लग रहा जिन्हे शब्दों में वयां करना मुश्किल है | ऐसा लग रहा था जैसे प्रकृति ने अपने सबसे सुंदर रंग यहीं बिखेर दिए हों। शाम का समय होने के कारण भीड़ भी कम थी और पूरा वातावरण बेहद शांत था। 

श्री रेणुका जी झील परिसर में प्रवेश करते ही महसूस हुआ कि यह सिर्फ एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि आस्था और प्रकृति का अद्भुत संगम है। इस परिसर में झील के साथ और मंदिर भी हैं -

  • माँ रेणुका मंदिर
  • भगवान परशुराम ताल
  • दशावतार मंदिर
  • प्रसाद की दुकानें
  • साफ-सुथरा परिसर

सब कुछ बेहद व्यवस्थित और शांत था।  झील का पानी इतना साफ था कि अंदर तैरती बड़ी-बड़ी मछलियाँ साफ दिखाई दे रही थीं। यहाँ आने वाले श्रद्धालु उन्हें आटा और दाना खिलाते हैं, जो इस जगह के आकर्षण को और बढ़ा देता है। 

पूरे दिन लगभग 400 किलोमीटर से अधिक स्कूटी चलाने के बाद शरीर पूरी तरह थक चुका था। झील के सामने ददऊ गाँव में एक होटल मिल गया। बालकनी वाला साफ-सुथरा कमरा, गीजर, अटैच बाथरूम और पहाड़ों का सुंदर दृश्य— सिर्फ ₹500 में। होटल में ही कुछ देर आराम करने के बाद डिनर किया तब तक ९ बज गए थे, क्यंकि पहाड़ों में बाजार जल्दी ही बंद हो जाते हैं |  दिन भर थकन होने के कारण जल्दी ही नींद आ गयी | उम्मीद करते हैं इस यात्रा का यह पहले भाग आपको पसंद आया होगा, बाकि यात्रा वीडियो नीचे हैं, आप वहां से देख सकते हैं, मिलते हैं जल्द ही अगले भाग में ---



पठानकोट से डलहौजी तक का यादगार सफर (Pathankot to Dalhousie Trip) Part-2

Part 2

पठानकोट जंक्शन पहुँचते ही सबसे पहले स्टेशन के बाहर का नज़ारा देखने लायक था। पहाड़ों की ठंडी हवा और शांत माहौल ने सफर की सारी थकान उतार दी। स्टेशन से बाहर निकलते ही मैं पैदल ही पठानकोट बस स्टैंड की ओर चल पड़ा।

जोगिंदर नगर रेल लाइन का प्लान बदला

मेरा प्लान था पठानकोट–जोगिंदर नगर नैरो गेज रेल लाइन से सफर करने का, लेकिन आगे काउंटर से जानकारी लेने पर पता चला कि यह रेल लाइन पिछले करीब दो साल से बंद है। रेल लाइन बंद होने की वजह से मैंने हिमाचल की ओर निकलने का फैसला किया और डलहौजी जाने का प्लान बना लिया। ऐसे में अब बस से आगे की यात्रा करनी थी।

पठानकोट बस स्टैंड से हिमाचल की ओर

पठानकोट जंक्शन से बस स्टैंड पास ही है और थोड़ी ही देर में मैं वहाँ पहुँच गया। बस स्टैंड पर अलग-अलग डेस्टिनेशन के लिए बहुत सारी बसें खड़ी थीं।

यहाँ से धर्मशाला, शिमला, चंबा, डलहौजी, कांगड़ा और जम्मू जैसे रूट्स के लिए आसानी से बस मिल जाती है। पहली बार आने वालों के लिए यहाँ इन्क्वायरी काउंटर भी मौजूद है।

पठानकोट से बनीखेत तक का सफर

डलहौजी के लिए डायरेक्ट बस नहीं थी, इसलिए पहले बनीखेत तक जाना पड़ा। बनीखेत से डलहौजी लगभग 6–7 किलोमीटर दूर है।

जैसे-जैसे पठानकोट सिटी से बाहर निकले, रास्ते में खूबसूरत पहाड़, शानदार सड़कें और ठंडी हवा सफर को और भी मज़ेदार बना रही थीं। पहाड़ी रास्तों पर यात्रा करने का अलग ही आनंद होता है।

सुबह करीब 8:30 बजे बस चली और लगभग 12:30 बजे हम बनीखेत पहुँचे।

बनीखेत से डलहौजी

बनीखेत पहुँचने के बाद ज़्यादा इंतज़ार नहीं करना पड़ा और डलहौजी के लिए बस मिल गई। रास्ते में मौसम बदलता हुआ लग रहा था, बादल छाए हुए थे और हल्की ठंड महसूस हो रही थी। आख़िरकार हम डलहौजी पहुँच गए।

डलहौजी में होटल और स्टे

बस से उतरकर मैं सुभाष चौक की ओर चला, जहाँ बजट होटल्स आसानी से मिल जाते हैं। यहाँ मुझे होटल न्यू मेट्रो पसंद आया और मैंने यहीं रूम ले लिया। इस होटल का किराया मुझे सिर्फ ₹800 पड़ा, जो सिंगल या डबल स्टे – दोनों के लिए काफ़ी अच्छा है।

डलहौजी की गलियाँ और मॉल रोड

कमरा लेने के बाद मैं बाहर घूमने निकला। सुभाष चौक से मॉल रोड की ओर जाने वाली सड़क बहुत ही सुंदर है।

मॉल रोड डलहौजी का मेन एरिया है, जहाँ शॉपिंग के कई ऑप्शन, खाने-पीने की अच्छी दुकानें है। मॉल रोड से आगे चलते हुए मैं गांधी चौक पहुँचा, जहाँ गांधी जी की प्रतिमा लगी हुई है।

यहाँ मैंने चंबा ढाबा में लंच में आलू का पराठा खाया, जो वाकई बहुत स्वादिष्ट था। अगर आप डलहौजी आएँ, तो यहाँ का आलू पराठा ज़रूर ट्राय करें। गांधी चौक पर लगे बोर्ड से आसपास की जगहों की जानकारी मिल जाती है।यहाँ से खजियार लगभग 22 किलोमीटर दूर है। बसें सुबह के समय मिलती हैं, वरना प्राइवेट टैक्सी लेनी पड़ती है।यहाँ मैंने बाइक और टैक्सी के रेट्स भी पूछे: बाइक/स्कूटर रेंट: ₹1200–1500 प्रति दिन (फ्यूल अलग), टैक्सी (लोकल साइटसीन): लगभग ₹2500 प्रति दिन

डलहौजी एक शांत, खूबसूरत और बजट-फ्रेंडली हिल स्टेशन है। अगर आप फैमिली, दोस्तों या सोलो ट्रैवल कर रहे हैं, तो यह जगह आपको ज़रूर पसंद आएगी।

उम्मीद है मेरी यह ट्रैवल जर्नी आपको पसंद आई होगी। बाकी नीचे पूरा वीडियो है, आप वहां देख सकते हैं कैसा रहा ये सफर..





दिल्ली सराय रोहिला से पठानकोट यात्रा Part-1

 नमस्ते दोस्तों,

आज मैं आप सभी के साथ अपनी पिछली ट्रेन  यात्रा शेयर करने जा रहा हूँ, जो मैंने दिल्ली सराय रोहिला से पठानकोट जंक्शन तक की थी। यह सफर न सिर्फ किफायती था, बल्कि अनुभवों से भी भरपूर रहा।

यात्रा की शुरुआत 

यह यात्रा मैंने ऑफिस के बाद शुरू की। नोएडा से मेट्रो के जरिए शास्त्री नगर मेट्रो स्टेशन पहुँचा और वहाँ से ई-रिक्शा लेकर दिल्ली सराय रोहिला रेलवे स्टेशन आ गया।

मेरी ट्रेन थी 14035 धौलाधार एक्सप्रेस, जो रात 11:20 बजे दिल्ली सराय रोहिला से रवाना होती है और सुबह लगभग 8:10 बजे पठानकोट जंक्शन पहुँचाती है।

मैंने इस सफर में जनरल क्लास से यात्रा की, वो भी सिर्फ ₹160 टिकट में।

मैं दिल्ली सराय रोहिला रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 4 पर ट्रेन का इंतज़ार कर रहा था। ट्रेन आने में लगभग दो घंटे का समय था। ट्रेन लगते ही जनरल कोच पूरी तरह भर गया, लेकिन मैं पहले चढ़ गया था, इसलिए मुझे सीट मिल गई।

ट्रेन का रूट और सफर

धौलाधार एक्सप्रेस का रूट थोड़ा अलग है। यह ट्रेन दिल्ली सराय रोहिला → बहादुरगढ़ → जींद → रोहतक → लुधियाना → जालंधर → पठानकोट जंक्शन होते हुए जाती है।

ट्रेन बिल्कुल राइट टाइम चल रही थी। बहादुरगढ़ और जींद जैसे स्टेशनों पर इसका छोटा-सा स्टॉपेज था।

इस ट्रेन में पेंट्री कार की सुविधा नहीं थी, इसलिए अगर आप इस ट्रेन में सफर करने वाले हैं, तो खाने-पीने का सामान पहले से साथ लेकर चलें।

मैंने अपने साथ फ्रूटी, नमकीन, चिप्स, बिस्किट और पानी की बोतल रखी थी, जिससे रात का सफर आराम से कट गया। सुबह के समय ट्रेन लुधियाना और फिर जालंधर कैंट से आगे बढ़ी। रास्ते में पंजाब और पठानकोट के आसपास का नज़ारा देखने लायक था।

करीब 491 किलोमीटर का सफर तय करने के बाद, ट्रेन सुबह 8:10 बजे बिल्कुल समय पर पठानकोट जंक्शन पहुँच गई। मौसम काफी सुहावना था, जिससे यात्रा और भी यादगार बन गई।

सिर्फ ₹160 में इतनी लंबी दूरी की यात्रा करना वाकई में एक शानदार अनुभव रहा।

बाकी नीचे पूरा वीडियो है, आप वहां देख सकते हैं कैसा रहा ये सफर..





हिमाचल की ओर - शिमला यात्रा Toward Himachal - Shimla Yatra



दिनांक : १६ जुलाई                                                                                                                                                                                         वैसे तो काफी दिनों से हिमाचल जाने के बारे में सोच रहा था | माँ वैष्णो देवी यात्रा के दौरान किसी कारण बश जाना नहीं हो सका |  लेकिन आखिरकार आज इस हिमाचल में शिमला यात्रा पर मुहर लग ही गयी | शनिवार की नाईट ड्यूटी करने के बाद सुबह तक यहाँ जाने का कोई इरादा नहीं था |  रविवार और सोमवार को मेरा साप्ताहिक अवकाश रहता है और मंगलवार को सांयकालीन ड्यूटी थी इसलिए काफी समय था | तो फिलहाल रविवार को दोपहर में भोजन करने के बाद अपना बैग पैक किया और रूम से सांय को ४:३० बजे नॉएडा सेक्टर १५ पहुंचे | चूँकि पहले से मेरा ना तो बस से ही और ना ही ट्रैन से शिमला जाने का रिज़र्वेशन था | वैसे अगर हिमाचल के किसी भी शहर जाना हो तो बसें  कश्मीरी गेट बस अड्डे से आसानी से मिल जाती हैं | करीब १:३० घंटे बाद ६:०० बजे दिल्ली स्थित कश्मीरी गेट बस अड्डे पहुँच गए |