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पठानकोट से डलहौजी तक का यादगार सफर Part-2

Part 2

पठानकोट जंक्शन पहुँचते ही सबसे पहले स्टेशन के बाहर का नज़ारा देखने लायक था। पहाड़ों की ठंडी हवा और शांत माहौल ने सफर की सारी थकान उतार दी। स्टेशन से बाहर निकलते ही मैं पैदल ही पठानकोट बस स्टैंड की ओर चल पड़ा।

जोगिंदर नगर रेल लाइन का प्लान बदला

मेरा प्लान था पठानकोट–जोगिंदर नगर नैरो गेज रेल लाइन से सफर करने का, लेकिन आगे काउंटर से जानकारी लेने पर पता चला कि यह रेल लाइन पिछले करीब दो साल से बंद है। रेल लाइन बंद होने की वजह से मैंने हिमाचल की ओर निकलने का फैसला किया और डलहौजी जाने का प्लान बना लिया। ऐसे में अब बस से आगे की यात्रा करनी थी।

पठानकोट बस स्टैंड से हिमाचल की ओर

पठानकोट जंक्शन से बस स्टैंड पास ही है और थोड़ी ही देर में मैं वहाँ पहुँच गया। बस स्टैंड पर अलग-अलग डेस्टिनेशन के लिए बहुत सारी बसें खड़ी थीं।

यहाँ से धर्मशाला, शिमला, चंबा, डलहौजी, कांगड़ा और जम्मू जैसे रूट्स के लिए आसानी से बस मिल जाती है। पहली बार आने वालों के लिए यहाँ इन्क्वायरी काउंटर भी मौजूद है।

पठानकोट से बनीखेत तक का सफर

डलहौजी के लिए डायरेक्ट बस नहीं थी, इसलिए पहले बनीखेत तक जाना पड़ा। बनीखेत से डलहौजी लगभग 6–7 किलोमीटर दूर है।

जैसे-जैसे पठानकोट सिटी से बाहर निकले, रास्ते में खूबसूरत पहाड़, शानदार सड़कें और ठंडी हवा सफर को और भी मज़ेदार बना रही थीं। पहाड़ी रास्तों पर यात्रा करने का अलग ही आनंद होता है।

सुबह करीब 8:30 बजे बस चली और लगभग 12:30 बजे हम बनीखेत पहुँचे।

बनीखेत से डलहौजी

बनीखेत पहुँचने के बाद ज़्यादा इंतज़ार नहीं करना पड़ा और डलहौजी के लिए बस मिल गई। रास्ते में मौसम बदलता हुआ लग रहा था, बादल छाए हुए थे और हल्की ठंड महसूस हो रही थी। आख़िरकार हम डलहौजी पहुँच गए।

डलहौजी में होटल और स्टे

बस से उतरकर मैं सुभाष चौक की ओर चला, जहाँ बजट होटल्स आसानी से मिल जाते हैं। यहाँ मुझे होटल न्यू मेट्रो पसंद आया और मैंने यहीं रूम ले लिया। इस होटल का किराया मुझे सिर्फ ₹800 पड़ा, जो सिंगल या डबल स्टे – दोनों के लिए काफ़ी अच्छा है।

डलहौजी की गलियाँ और मॉल रोड

कमरा लेने के बाद मैं बाहर घूमने निकला। सुभाष चौक से मॉल रोड की ओर जाने वाली सड़क बहुत ही सुंदर है।

मॉल रोड डलहौजी का मेन एरिया है, जहाँ शॉपिंग के कई ऑप्शन, खाने-पीने की अच्छी दुकानें है। मॉल रोड से आगे चलते हुए मैं गांधी चौक पहुँचा, जहाँ गांधी जी की प्रतिमा लगी हुई है।

यहाँ मैंने चंबा ढाबा में लंच में आलू का पराठा खाया, जो वाकई बहुत स्वादिष्ट था। अगर आप डलहौजी आएँ, तो यहाँ का आलू पराठा ज़रूर ट्राय करें। गांधी चौक पर लगे बोर्ड से आसपास की जगहों की जानकारी मिल जाती है।यहाँ से खजियार लगभग 22 किलोमीटर दूर है। बसें सुबह के समय मिलती हैं, वरना प्राइवेट टैक्सी लेनी पड़ती है।यहाँ मैंने बाइक और टैक्सी के रेट्स भी पूछे: बाइक/स्कूटर रेंट: ₹1200–1500 प्रति दिन (फ्यूल अलग), टैक्सी (लोकल साइटसीन): लगभग ₹2500 प्रति दिन

डलहौजी एक शांत, खूबसूरत और बजट-फ्रेंडली हिल स्टेशन है। अगर आप फैमिली, दोस्तों या सोलो ट्रैवल कर रहे हैं, तो यह जगह आपको ज़रूर पसंद आएगी।

उम्मीद है मेरी यह ट्रैवल जर्नी आपको पसंद आई होगी। बाकी नीचे पूरा वीडियो है, आप वहां देख सकते हैं कैसा रहा ये सफर..