Sunday, 27 November 2016

दिल्ली की शान : कुतुबमीनार

दिनांक : २६ नवम्बर , दिन : शानिवार 

शुक्रवार का दिन आते ही मन में कहीं नकहीं जाने का विचार आने लगता है । इस वार भी कुछ ऐसा ही हुआ । पहले तो मथुरा या फिर आगरा जाने का प्रोग्राम बना पर शनिवार कि सुबह होते होते कुछ कारणों से विचार बदल जाने से ना जाने कब कुतुबमीनार और छतरपुर मंदिर जाना तय हुआ पता ही नहीं चला । खैर चलते है इस सफर पर आगरा और मथुरा फिर कभी ।


सुबह सुबह ही तैयार होकर अपनी पत्नी के साथ दिल्लीके सफर पर रवाना हुए । वैसे तो अधिकतर लोग परिचित ही होंगे लेकिन फिर भी जानकारी के लिए बताते चलें की कुतुबमीनार अपने आप में मेट्रो स्टेशन है जो हुडा सिटी सेंटर वाली मेट्रो लाइन पर साकेत से अगला स्टेशन है । नॉएडा से जाने के लिए आपको राजीव चौक स्टेशन से लाइन बदलकर जाना होगा ।  हम लोग भी सुबह ९:३० बजे सुबह निकलकर करीब ११:०० बजे कुतुबमीनार स्टेशन पहुंचे । वहां से ऑटो करते हुए वस् १५ मिनट में ही कुतुबमीनार काम्प्लेक्स परिषर में थे । शनिवार सप्ताहांत का दिन होने के कारण दर्शकों की अच्छी खाशी भीड़ थी । किन्तु टिकट काउंटर पर भीड़ नहीं थी । आसानी से ३० रुपये प्रति व्यक्ति के हिसाब से २ टिकेट लेलिये । साथ ही ५ रुपये बैग रखने के लिए जमा करा दिया ।



वैसे तो दिल्ली के अधिकतर दर्शनीय स्थल मेरे देखे हुए है लेकिन कुतुबमीनार आज पहली बार आना हुआ इसलिए अलग ही उत्साह था ।टिकेट काउंटर के पास से ही कुतुबमीनार का पहला दीदार करना एक नया ही अनुभव था । चलिए अब गेट से अंदर चलते हैं लेकिन उससे पहले कुछ कुतुबमीनार के बारे में चर्चा करते हैं । कुतुबमीनार मुग़ल सल्तनत के शासन काल की अनूठी उपलव्धि है और यह विश्व की दूसरी सबसे ऊँची पत्थरों से निर्मित इमारत है । कुतबमीनार की ऊंचाई ७२.८  मीटर है जिसमे ५ मंजिले है साथ ही २७३ सीढ़ियां भी हैं जो आखिरी मंजिल तक जाती हैं । 

इसके निर्माण की शुरुआत वैसे तो मुग़ल शाशक कुतबुद्दीन ऐबक ने की लेकिन मीनार को पूर्ण करवाने का श्रेय इल्तुतमिश को जाता है । १९८१ की घटना के बाद से अंदर सीढ़ियों पर चढ़ने की इजाजत नहीं है । ये तो रही कुतबमीनार से जुडी कुछ जानकारियां इसके बारे में नेट पर और भी जानकारी उपलब्ध है और हाँ साथ ही परिसर में एक अधूरी लेकिन कुतुबमीनार से दोगुनी परिधि की अलाइ मीनार भी है साथ ही कई मुग़लकालीन गेट और कब्रगाह के साथ में प्राचीन कुँए भी स्थित हैं । 

अंदर पहुंचकर काफी अच्छा लगा और फोटो भी लिए । परिषर में कुछ विदेशी मेहमान भी गाइडों के साथ कुतुबमीनार का दीदार कर रहे थे । करीब २ घंटे का समय व्यतीत करने के बाद हम लोग घूमते हुए बाहर आये । और फिर ऑटो करते हुए वापस मेट्रो स्टेशन आये और अब अपने यात्रा के अगले पड़ाव छतरतपुर के मंदिर के लिए रवाना हुए । अगली कड़ी में आप छतरपुर मंदिर दर्शन के बारे में पढ़ेंगे तब तक इस यात्रा से जुड़े हुए फोटों के साथ आनन्द  लीजिये ।














अलाई मीनार


एक झलक और

जानकारी देता हुआ नक्सा


















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