यात्रा के पिछले देखा की श्री रेणुका झील और मंदिर दर्शन के बाद, मैंने पास में ही होटल ले लिया था | अब आगे ----
कभी-कभी किसी यात्रा का सबसे खूबसूरत हिस्सा मंज़िल नहीं, बल्कि उसकी सुबह होती है।
सुबह के लगभग 6:30 बजे नींद खुली, जब होटल की बालकनी का दरवाज़ा खोला, तो सामने फैली पहाड़ों की हरियाली, हल्की धुंध और उगते सूरज की सुनहरी किरणें किसी पोस्टकार्ड जैसी लग रही थीं। नीचे ददोऊ गांव का छोटा-सा बस स्टैंड, हिमाचल रोडवेज़ की पहली बस और चारों ओर फैली शांति काफी सुन्दर दृश्य था, जिसे कैमरा कैद तो कर सकता है, लेकिन बिना वहाँ जाये महसूस नहीं किया जा सकता है ।
यही वह पल था जब लगा कि यात्रा का दूसरा दिन भी पहले दिन जितना ही खास होने वाला है।
अक्सर लोग श्री रेणुका झील घूमकर वापस लौट जाते हैं, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि यहां से मात्र 5–6 किलोमीटर की दूरी पर एक बेहद खूबसूरत जगह मौजूद है—जटाम डैम। रास्ता थोड़ा उबड़-खाबड़ था, लेकिन जैसे ही डैम के पास पहुँचे, सारी थकान गायब हो गई। शांत पानी, चारों तरफ पहाड़, उगता हुआ सूरज और दूर पहाड़ी पर दिखता मंदिर—यह दृश्य किसी फिल्म से कम नहीं था।
अगर आप भी श्री रेणुका जी की यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो इस जगह को अपनी सूची में ज़रूर शामिल करें।
यह जानकर राहत मिली कि श्री रेणुका जी जैसे छोटे कस्बे में भी यात्रियों के लिए अच्छी सुविधाएँ उपलब्ध हैं।
- होटल और होमस्टे आसानी से मिल जाते हैं।
- पेट्रोल पंप भी मौजूद है।
- बजट के अनुसार रुकने के कई विकल्प उपलब्ध हैं।
इसलिए यदि आप बाइक या स्कूटी से यात्रा कर रहे हैं, तो रहने या ईंधन की चिंता करने की जरूरत नहीं है।
जब जटाम डैम से वापस आ रहे थे तो रस्ते में ही पेट्रो पम्प पड़ता है, जहाँ से स्कूटी फुल टैंक करा ली | क्योंकि आज ही वापस नॉएडा भी पहुंचना था | अब तक सुबह के ८ बज गए थे | इस बार वापस अलग मार्ग नाहन होते हुए का विचार किया |
यात्रा का अगला पड़ाव था नाहन।
स्थानीय लोगों और अपने अनुभव के आधार पर एक बात स्पष्ट हुई—
यदि आप श्री रेणुका जी जा रहे हैं या वापस आ रहे हैं , तो नाहन वाला मार्ग चुनें।
पहले दिन पांवटा साहिब वाले रास्ते से आने पर सड़कें काफी खराब मिली थीं, जबकि नाहन की ओर जाने वाली सड़कें अधिक आरामदायक और खूबसूरत थीं। रास्ते में हर मोड़ पर पहाड़, घाटियां और जंगल यात्रा को और यादगार बनाते रहे। करीब डेढ़ घंटे बाद नाहन पहुँचना हुआ। यह शहर साफ-सुथरा, व्यवस्थित और शांत लगा। सड़कें अच्छी थीं, ट्रैफिक नियंत्रित था और सुबह का चाय नाश्ता भी यहीं किया गया।
जैसे-जैसे पहाड़ पीछे छूटते गए, रास्ता मैदानों में बदलने लगा। काला अंब, जगाधरी और कुरुक्षेत्र होते हुए यात्रा आगे बढ़ी। आगे का सफर काफी आरामदायक रहा। कुछ ही देर में पंजाब और हरियाणा के विशाल गेहूं के खेत दिखाई देने लगे। दूर-दूर तक फैली हरियाली इस बात का एहसास करा रही थी कि भारत का हर इलाका अपनी अलग खूबसूरती समेटे हुए है।
एक छोटी-सी गलती, जो बड़ी परेशानी बन सकती थी
यात्रा लगभग सामान्य चल रही थी, तभी अचानक स्कूटी बीच रास्ते में बंद हो गई। पहले लगा कि शायद कोई बड़ी तकनीकी खराबी आ गई है, लेकिन पास के मैकेनिक ने इंजन ऑयल चेक किया तो पता चला कि ऑयल लगभग खत्म हो चुका था। किस्मत अच्छी थी पास में ही मैकेनिक की शॉप मिल गयी, स्कूटी में इंजन ऑयल बिलकुल बिल्कुल भी नहीं बचा था, सिर्फ ₹300 का इंजन ऑयल डालने के बाद स्कूटी तुरंत स्टार्ट हो गई। उस समय यह एहसास हुआ कि यदि थोड़ी और लापरवाही होती, तो इंजन सीज़ भी हो सकता था।
यह अनुभव हर बाइक और स्कूटी राइडर के लिए एक महत्वपूर्ण सीख है—
लंबी यात्रा से पहले इंजन ऑयल, टायर, ब्रेक और सर्विस की पूरी जांच जरूर करें।
करनाल में रुककर लंच किया और सिर्फ ₹20 में एक अच्छी चाय पी, जिसने पूरे सफर की थकान कम कर दी। आगे मुरथल के पास गन्ने का रस पीकर एक छोटा-सा ब्रेक लिया। लंबी रोड ट्रिप में ऐसे छोटे विराम सफर को और भी सुखद बना देते हैं। शाम करीब 4:50 बजे नोएडा में प्रवेश हुआ और कुछ ही मिनटों बाद यह लंबी लेकिन यादगार स्कूटी यात्रा अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच गई।
यात्रा से मिली सबसे बड़ी सीख
इस पूरी यात्रा ने सिर्फ नए स्थान नहीं दिखाए, बल्कि कई बातें भी सिखाईं—
- सुबह जल्दी निकलने का अपना अलग ही आनंद है।
- मुख्य पर्यटन स्थलों के आसपास छिपी जगहें भी जरूर देखें।
- पहाड़ों में जल्दबाज़ी नहीं, धैर्य सबसे बड़ा साथी है।
- वाहन की नियमित जांच लंबी यात्रा के लिए बेहद जरूरी है।
- सफर का असली आनंद मंज़िल से ज्यादा रास्तों में छिपा होता है।
यदि आप भी श्री रेणुका जी जा रहे हैं, तो ये बातें याद रखें
- जटाम डैम ज़रूर जाएँ।
- नाहन वाला मार्ग चुनें।
- सुबह जल्दी यात्रा शुरू करें।
- स्कूटी, कार या बाइक का इंजन ऑयल पहले ही चेक कर लें।
- रास्ते में छोटे-छोटे ब्रेक लेते रहें।
- प्रकृति का आनंद लें और जंगलों में स्वच्छता तथा आग से सुरक्षा का ध्यान रखें।