आज मेरी यात्रा का अगला था। सुबह करीब 8:30 बजे मुझे डलहौजी से खजियार के लिए बस मिल गई। होटल से चेकआउट करने के बाद मैं सीधे डलहौजी बस स्टैंड की ओर निकल पड़ा।
सुबह का डलहौजी और सुभाष चौक का नज़ारा
सुबह-सुबह मौसम बिल्कुल साफ़ था। सुभाष चौक से दिखने वाला पहाड़ों का नज़ारा बेहद खूबसूरत लग रहा था। दूर-दूर तक पहाड़ साफ़ दिखाई दे रहे थे और ठंडी हवा चल रही थी।
यहाँ एक अच्छी बात यह है कि डलहौजी के ज़्यादातर मेन होटल्स में पार्किंग की सुविधा होटल की छत पर ही मिल जाती है। अगर आप अपनी गाड़ी से आ रहे हैं, तो पार्किंग की कोई टेंशन नहीं ।
डलहौजी से खजियार की बस यात्रा
खजियार के लिए बस सुबह मिल जाती है। मुझे ₹50 का टिकट मिला और बताया गया कि लगभग 10:00–10:15 बजे तक हम खजियार पहुँच जाएंगे।
रास्ता बहुत ही सुंदर था, लेकिन साथ ही काफी नैरो रोड भी है। अगर सामने से कोई बस या कार आ जाए, तो कई जगहों पर गाड़ी को पीछे करना पड़ता है। फिर भी इस रास्ते का व्यू इतना शानदार है कि सफर अपने आप यादगार बन जाता है।
रास्ते में डलहौजी पब्लिक स्कूल के बच्चे लाइन से स्कूल जाते हुए दिखाई दिए, जो देखने में काफी प्यारा दृश्य था।
करीब 10:20 बजे हम खजियार पहुँच गए। जैसे ही बस से उतरे, सामने दिखा खजियार का फेमस व्यू पॉइंट।
खजियार को यूँ ही “भारत का स्वर्ग” नहीं कहा जाता — हरे-भरे मैदान, चारों तरफ जंगलों से ढके पहाड़, ठंडी हवा और खुला आसमान… सब कुछ बहुत ही खूबसूरत था।
नीचे टूरिस्ट के लिए अच्छे होटल, खाने-पीने की शॉप्स और बैठने की जगहें भी मौजूद हैं।
खजियार की प्राकृतिक सुंदरता
खजियार का हरा-भरा मैदान, पीछे फैली हुई पर्वत श्रृंखलाएँ और बीच में बना छोटा-सा तालाब इस जगह को और भी खास बना देता है।
यहाँ आप:
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नेचर फोटोग्राफी
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फूलों और रैबिट्स के साथ फोटो
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फैमिली या फ्रेंड्स के साथ आराम से घूमना
सब कुछ कर सकते हैं।
खजियार कैसे पहुँचे?
अगर आप खजियार आना चाहते हैं, तो ये ऑप्शन हैं:
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पठानकोट → बनीखेत → डलहौजी → खजियार
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पठानकोट → चंबा → खजियार
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कम बजट में: डलहौजी से सुबह की बस (₹50)
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फैमिली/ग्रुप के लिए: डलहौजी या चंबा से टैक्सी
खजियार में खाने-पीने के ऑप्शन
खजियार में कई छोटी-छोटी दुकानेंहैं।
मैंने यहाँ चाय और आलू का पराठा ऑर्डर किया, जो काफी टेस्टी था। सुबह के नाश्ते के लिए यह एक बढ़िया ऑप्शन है।
हॉर्स राइडिंग और एक्टिविटीज
खजियार में हॉर्स राइडिंग भी अवेलेबल है:
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शॉर्ट राइड: ₹300 (लगभग 1 किमी)
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फुल राइड: ₹500 (शिव मंदिर तक)
इसके अलावा यहाँ पैराग्लाइडिंग जैसी एक्टिविटीज की जानकारी भी लोकल लेवल पर मिल जाती है।
अगर आप हिमाचल आ रहे हैं, तो डलहौजी के साथ खजियार जरूर शामिल करें। यह ट्रिप बजट में भी हो जाती है और नेचर लवर्स के लिए परफेक्ट है।
खजियार से चंबा और फिर पठानकोट
करीब 11:30 बजे खजियार से चंबा होते हुए पठानकोट जाने वाली बस मिल गई। खजियार से चंबा का टिकट ₹50 था।
चंबा शहर पहुँचते ही सामने दिखा रावी नदी, जो शहर के बीचों-बीच बहती है। चंबा हिमाचल का एक मुख्य शहर है और यहाँ से:
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शिमला
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पठानकोट
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भरमौर
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अन्य बड़े शहरों के लिए बसें आसानी से मिल जाती हैं।