डलहौजी से खजियार और फिर चंबा होते हुए पठानकोट Part-3

आज मेरी यात्रा का अगला था। सुबह करीब 8:30 बजे मुझे डलहौजी से खजियार के लिए बस मिल गई। होटल से चेकआउट करने के बाद मैं सीधे डलहौजी बस स्टैंड की ओर निकल पड़ा।

सुबह का डलहौजी और सुभाष चौक का नज़ारा

सुबह-सुबह मौसम बिल्कुल साफ़ था। सुभाष चौक से दिखने वाला पहाड़ों का नज़ारा बेहद खूबसूरत लग रहा था। दूर-दूर तक पहाड़ साफ़ दिखाई दे रहे थे और ठंडी हवा चल रही थी।

यहाँ एक अच्छी बात यह है कि डलहौजी के ज़्यादातर मेन होटल्स में पार्किंग की सुविधा होटल की छत पर ही मिल जाती है। अगर आप अपनी गाड़ी से आ रहे हैं, तो पार्किंग की कोई टेंशन नहीं ।

डलहौजी से खजियार की बस यात्रा

खजियार के लिए बस सुबह मिल जाती है। मुझे ₹50 का टिकट मिला और बताया गया कि लगभग 10:00–10:15 बजे तक हम खजियार पहुँच जाएंगे।

रास्ता बहुत ही सुंदर था, लेकिन साथ ही काफी नैरो रोड भी है। अगर सामने से कोई बस या कार आ जाए, तो कई जगहों पर गाड़ी को पीछे करना पड़ता है। फिर भी इस रास्ते का व्यू इतना शानदार है कि सफर अपने आप यादगार बन जाता है।

रास्ते में डलहौजी पब्लिक स्कूल के बच्चे लाइन से स्कूल जाते हुए दिखाई दिए, जो देखने में काफी प्यारा दृश्य था।

करीब 10:20 बजे हम खजियार पहुँच गए। जैसे ही बस से उतरे, सामने दिखा खजियार का फेमस व्यू पॉइंट

खजियार को यूँ ही “भारत का स्वर्ग” नहीं कहा जाता — हरे-भरे मैदान, चारों तरफ जंगलों से ढके पहाड़, ठंडी हवा और खुला आसमान… सब कुछ बहुत ही खूबसूरत था।

नीचे टूरिस्ट के लिए अच्छे होटल, खाने-पीने की शॉप्स और बैठने की जगहें भी मौजूद हैं।

खजियार की प्राकृतिक सुंदरता

खजियार का हरा-भरा मैदान, पीछे फैली हुई पर्वत श्रृंखलाएँ और बीच में बना छोटा-सा तालाब इस जगह को और भी खास बना देता है।
यहाँ आप:

  • नेचर फोटोग्राफी

  • फूलों और रैबिट्स के साथ फोटो

  • फैमिली या फ्रेंड्स के साथ आराम से घूमना

सब कुछ कर सकते हैं।

खजियार कैसे पहुँचे?

अगर आप खजियार आना चाहते हैं, तो ये ऑप्शन हैं:

  • पठानकोट → बनीखेत → डलहौजी → खजियार

  • पठानकोट → चंबा → खजियार

  • कम बजट में: डलहौजी से सुबह की बस (₹50)

  • फैमिली/ग्रुप के लिए: डलहौजी या चंबा से टैक्सी

खजियार में खाने-पीने के ऑप्शन

खजियार में कई छोटी-छोटी दुकानेंहैं।

मैंने यहाँ चाय और आलू का पराठा ऑर्डर किया, जो काफी टेस्टी था। सुबह के नाश्ते के लिए यह एक बढ़िया ऑप्शन है।

हॉर्स राइडिंग और एक्टिविटीज

खजियार में हॉर्स राइडिंग भी अवेलेबल है:

  • शॉर्ट राइड: ₹300 (लगभग 1 किमी)

  • फुल राइड: ₹500 (शिव मंदिर तक)

इसके अलावा यहाँ पैराग्लाइडिंग जैसी एक्टिविटीज की जानकारी भी लोकल लेवल पर मिल जाती है।

अगर आप हिमाचल आ रहे हैं, तो डलहौजी के साथ खजियार जरूर शामिल करें। यह ट्रिप बजट में भी हो जाती है और नेचर लवर्स के लिए परफेक्ट है।

खजियार से चंबा और फिर पठानकोट 

करीब 11:30 बजे खजियार से चंबा होते हुए पठानकोट जाने वाली बस मिल गई। खजियार से चंबा का टिकट ₹50 था।

चंबा शहर पहुँचते ही सामने दिखा रावी नदी, जो शहर के बीचों-बीच बहती है। चंबा हिमाचल का एक मुख्य शहर है और यहाँ से:

  • शिमला

  • पठानकोट

  • भरमौर

  • अन्य बड़े शहरों के लिए बसें आसानी से मिल जाती हैं।

चंबा से पठानकोट की वापसी

वापसी की यात्रा: चंबा से पठानकोट तक का यादगार सफर

नमस्ते दोस्तों, डलहौजी, खजियार और चंबा की खूबसूरत यात्रा के बाद अब मेरी वापसी की यात्रा शुरू हो चुकी थी। चंबा से पठानकोट की ओर निकलते हुए यह सफर भी उतना ही यादगार और अनुभवों से भरा रहा।

रास्ते में मणिमहेश यात्रा के लंगर

जैसे-जैसे बस आगे बढ़ती गई, रास्ते में अगस्त और सितंबर में चलने वाली मणिमहेश यात्रा की वजह से जगह-जगह लंगर लगे हुए दिखाई दिए। शिव भक्तों के लिए लगाए गए ये लंगर न सिर्फ आस्था का प्रतीक हैं, बल्कि यात्रियों के लिए बहुत बड़ी राहत भी होते हैं।

एक जगह बस ड्राइवर साहब ने लंगर के पास बस रोक दी, ताकि यात्री थोड़ा आराम कर सकें और खाना खा सकें। मुझे भी भूख लग रही थी, तो मैंने भी वहीं चावल, दाल, सब्ज़ी और खीर का प्रसाद लिया। खाना बहुत ही स्वादिष्ट था और पूरे मन से परोसा जा रहा था।

बनीखेत तिराहा और रास्तों की जानकारी

रास्ते में बनीखेत तिराहा आता है, जहाँ से: बाईं ओर का रास्ता डलहौजी की ओर जाता है,

एक रास्ता मणिमहेश की ओर जाता है (करीब 110 किमी) और सीधा रास्ता पठानकोट की ओर हमारी बस पठानकोट की ओर बढ़ रही थी। लंच के बाद फिर से यात्रा शुरू हुई। चारों तरफ फैले पहाड़, घुमावदार सड़कें और ठंडी हवा सफर को और भी खास बना रही थीं। कहीं-कहीं बस कुछ मिनटों के लिए रुकी, जहाँ ऊपर से गिरता हुआ पानी और पहाड़ों का नज़ारा देखने को मिला। लगभग दो से ढाई घंटे का और सफर बाकी था। धीरे-धीरे ऊँचाई कम होती गई और पहाड़ों की चोटियाँ पीछे छूटती चली गईं।

शाम करीब 4 बजे के आसपास हम पठानकोट सिटी में एंटर कर चुके थे। कंडक्टर साहब ने बताया कि अब लगभग एक घंटे में हम रेलवे स्टेशन पहुँच जाएंगे। जैसे-जैसे शहर नज़दीक आता गया, पहाड़ी इलाका मैदानी क्षेत्र में बदलता गया। शाम करीब 5:20 बजे हम पठानकोट कैंट रेलवे स्टेशन पहुँच गए। स्टेशन के ठीक सामने आपको रेल कोच रेस्टोरेंट देखने को मिल जाएगा, जहाँ रेलवे कोच के अंदर बैठकर खाना खा सकते हैं। यहाँ अलग-अलग बजट में थाली उपलब्ध है — लगभग ₹180 से ₹300 तक। आप फैमिली, दोस्तों या अकेले भी यहाँ आराम से बैठकर खाना एंजॉय कर सकते हैं।

उम्मीद करता हूँ आपको मेरी यह ट्रैवल जर्नी पसंद आई होगी। और कमेंट में बताइए आपको यह सफर कैसा लगा | फिर मिलेंगे एक नई यात्रा और नए अनुभवों के साथ । बाकी नीचे पूरा वीडियो है, आप वहां देख सकते हैं कैसा रहा ये सफर..

डलहौजी से खजियार





दिल्ली सराय रोहिला से पठानकोट यात्रा Part-1

 नमस्ते दोस्तों,

आज मैं आप सभी के साथ अपनी पिछली ट्रेन  यात्रा शेयर करने जा रहा हूँ, जो मैंने दिल्ली सराय रोहिला से पठानकोट जंक्शन तक की थी। यह सफर न सिर्फ किफायती था, बल्कि अनुभवों से भी भरपूर रहा।

यात्रा की शुरुआत 

यह यात्रा मैंने ऑफिस के बाद शुरू की। नोएडा से मेट्रो के जरिए शास्त्री नगर मेट्रो स्टेशन पहुँचा और वहाँ से ई-रिक्शा लेकर दिल्ली सराय रोहिला रेलवे स्टेशन आ गया।

मेरी ट्रेन थी 14035 धौलाधार एक्सप्रेस, जो रात 11:20 बजे दिल्ली सराय रोहिला से रवाना होती है और सुबह लगभग 8:10 बजे पठानकोट जंक्शन पहुँचाती है।

मैंने इस सफर में जनरल क्लास से यात्रा की, वो भी सिर्फ ₹160 टिकट में।

मैं दिल्ली सराय रोहिला रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 4 पर ट्रेन का इंतज़ार कर रहा था। ट्रेन आने में लगभग दो घंटे का समय था। ट्रेन लगते ही जनरल कोच पूरी तरह भर गया, लेकिन मैं पहले चढ़ गया था, इसलिए मुझे सीट मिल गई।

ट्रेन का रूट और सफर

धौलाधार एक्सप्रेस का रूट थोड़ा अलग है। यह ट्रेन दिल्ली सराय रोहिला → बहादुरगढ़ → जींद → रोहतक → लुधियाना → जालंधर → पठानकोट जंक्शन होते हुए जाती है।

ट्रेन बिल्कुल राइट टाइम चल रही थी। बहादुरगढ़ और जींद जैसे स्टेशनों पर इसका छोटा-सा स्टॉपेज था।

इस ट्रेन में पेंट्री कार की सुविधा नहीं थी, इसलिए अगर आप इस ट्रेन में सफर करने वाले हैं, तो खाने-पीने का सामान पहले से साथ लेकर चलें।

मैंने अपने साथ फ्रूटी, नमकीन, चिप्स, बिस्किट और पानी की बोतल रखी थी, जिससे रात का सफर आराम से कट गया। सुबह के समय ट्रेन लुधियाना और फिर जालंधर कैंट से आगे बढ़ी। रास्ते में पंजाब और पठानकोट के आसपास का नज़ारा देखने लायक था।

करीब 491 किलोमीटर का सफर तय करने के बाद, ट्रेन सुबह 8:10 बजे बिल्कुल समय पर पठानकोट जंक्शन पहुँच गई। मौसम काफी सुहावना था, जिससे यात्रा और भी यादगार बन गई।

सिर्फ ₹160 में इतनी लंबी दूरी की यात्रा करना वाकई में एक शानदार अनुभव रहा।

बाकी नीचे पूरा वीडियो है, आप वहां देख सकते हैं कैसा रहा ये सफर..





जयपुर से दिल्ली का सफर

दोस्तों कैसे हैं आप सब, आशा करते हैं आप सब अच्छे होंगे!

तो पिछले ब्लॉग में आपने देखा कि मैं दिल्ली वापसी के लिए जयपुर स्टेशन आ गया था, वापसी में ट्रेन का मैने तत्काल में स्लीपर से टिकट करा लिया था, लेकिन वीडियो और फोटो की वजह से शीट पर बहुत कम देर बैठना हुआ, बाकी नीचे पूरा वीडियो है, आप वहां देख सकते हैं कैसा रहा ये सफर..



नोएडा से जयपुर का सफर

दोस्तो काफ़ी समय के बाद ये यात्रा व्लॉग लिख रहे हैं, मुझे आशा है कि आप सब अच्छे होंगे। मैं भी अच्छा हूँ,तो चलते हैं अपनी यात्रा सफ़र पर।

आज इस नोएडा से जयपुर के सफर पर चलते हैं, वे तो काफी समय पहले ही तय कर लें कि जयपुर चलते हैं। लेकिन जना आज हुआ. ऑफिस से ड्यूटी करने के बाद शाम को 7:40 बजे बजे सेक्टर 15 नोएडा मेट्रो स्टेशन के पास। हमें दिल्ली कैंट से जयपुर ट्रेन का सफर करना था। पहले से कोई आरक्षण भी नहीं था। इसलिए आज जनरल क्लास से ही जाना था। पहली बार जयपुर जा रहे थे इसलिए मन में अलग ही उत्साह था। फिलाहल 8:35 बजे दिल्ली कैंट रेलवे स्टेशन पहुंच गया। करीब 20 मिनट में जनरल क्लास का टिकट लेकर प्लेटफार्म पर आ गए। 155 रुपये का जयपुर का टिकट ले लिया, ट्रेन यहीं दिल्ली कैंट से ही बनकर चती है, इसलिए आसानी से शीट मिल गई, अपनी ट्रेन 19702 सैनिक एक्सप्रेस थी जो अपने निर्देशित समय रात में 12:07 बजे यहां से चल दी।

यह ट्रेन काफी घूमकर 19 जगह रुकने के बाद सुबह 8:15 बजे जयपुर पहुंचती है। फिलाहल ट्रेन चल दी गुड़गांव, रेवाडी, पटौदी रोड, लोहारू जंक्शन पर ट्रेन फुंची, यहां इस ट्रेन का 30 मिनट का इंतजार है, लोको रिवर्सल होता है, इसी बीच मैंने भी कुछ नास्ता किया। और रात 3:45 बजे ट्रेन चल दी, मुझे पूरी रात वीडियो भी बनाना था इसलिए नींद भी नहीं आ रही थी। कोच में अब तक अच्छी खासी भीड़ हो चुकी थी। ज्यादातर यात्री बाबा खाटू श्याम नगरी, रींगस जा रहे थे।

मेरी साइड में विंडो वाली शीट थी, जिसकी हवा आ रही थी और अच्छा भी लग रहा था। आगे ट्रेन सूरजगढ़, झुंझुनू और नवलगढ़ होते हुए सुबह लगभाग 6:10 बजे सुबह सीकर जंक्शन पहुची। सीकर राजस्थान का एक बड़ा जिला है ! अब तक उजाला भी हो गया था,  अब वीडियो बनाने में और अच्छा लग रहा था। यहां  10 रुपये की चाय पी। यहां से कई यात्री चढ़े और उतरे। अभी भी यहां जयपुर का 2:20 मिनट का सफर बाकी था।

सीकर के बाद होते हुए यह सैनिक एक्सप्रेस ट्रेन सुबह 7:12 मिनट पर रींगस पाहुंची। यहां काफी पैसेंजर्स उतरे और लगभग ट्रेन खाली हो गई। ज्यादातार यात्री बाबा श्याम की नगरी खाटू श्याम जी जा रहे थे। अब तक अच्छा उजाला हो गया था। मैंने भी ट्रेन में ही सुबह ब्रश किया और फिर एक और चाय पी साथ में बिस्किट भी । इसके बाद ट्रेन चोमू सामोद होते हुए आखिर 8:27 बजे जयपुर जंक्शन पहुंच गई। यहां तक ​​आते-आते ट्रेन लगभग 15 मिनट लेट पहुंची।

ट्रेन से उतरे कुछ देर आराम किया फिर प्लेटफार्म नंबर 1 से बाहर निकलते हुए बाहर आ गए। यहां से ऑटो वाले सिंधी कैंप बस स्टैंड, चौपड़ चौपड़ आवाज लगा रहे थे। मैंने तय किया कि पहले सिंधी बस स्टैंड चलते है वहां कोई होटल देखेंगे। 20 रुपए ई रिक्शा वाले को देकर बस स्टैंड पहुंच गए। यहां पास में ही बहुत सारे होटल हैं, आप अपने हिसाब से बजट के अनुसार बुक कर सकते हैं। मैं अकेला था इसलिए डोरमेट्री में ही २०० रुपए में, एक बेड लेकर रेस्ट करने लगा, अगर आप भी अकेले आते हैं तो डोरमेट्री में रुक सकते है!

और यहीं पास में केवल 200 रुपये में 24 घंटे के लिए बिस्तर ले लिया, आखिर मुझे भी बस कुछ देर आराम करके जयपुर ही तो घूमना था। बैग रखकर फ्रेश हुए और  2 घंटे की नींद ली। तब तक 12:30 बज चुके थे । आलमारी में बैग रख कर ताला लगा दिया। पास में ही एक होटल पर आलू प्याज़ परांठे का नाश्ता किया साथ में चाय भी। अब अच्छा लग रहा था. होटल वाले भैया ने बताया यहां आप अगर घूमना चाहते हैं तो  मेट्रो से भी सफर कर सकते हैं। मेट्रो यही सिन्धी बस स्टैंड के पास में ही है। 12 रुपये का मेट्रो का टिकट लेकर बड़ी चौपड़ पहुंच गए. इसी पास में ही हवामहल है, आप चौराहे से पैदल ही जा सकते हैं, हवामहल पहुंचकर कुछ फोटो क्लिक किए, वीडियो बनाएं, कुछ और भाई लोग मिल गए जो सवाई माधोपुर से यहां घूमने आए थे और आमेर किला जा रहे थे। मैं भी उनके साथ हवामहल के बाद आमेर किले के लिए तैयार हो गया। 

30 रुपये लोकल बस से आमेर फोर्ट पहुंचने में लगे। रास्ते में ही जयपुर का मशहूर जलमहल भी दिख गया। करीब २५ मिनट बाद आमेर किले के अंदर पहुंचे, यहां प्रवेश निःशुल्क है। काफ़ी सुंदर यह किला है, काफ़ी अच्छा लग रहा था। फोर्ट पहाड़ी पर होने के कारण ठंडा भी लग रहा था। पास में ही दूसरी पहाड़ी पर किले की दीवार भी दिख रही थी । गाड़ी वाले 250 रुपये में  किले के गेट तक ले जा रहे थे, साथ ही काई ट्रैवल गाइड भी लोगों को इस किले के इतिहास के बारे में बता रहे थे। कुल मिलाकर काफी अच्छा लगा इस आमेर फोर्ट को देखकर, कुछ फोटो लीजिए, वीडियो बनाया.

करीब 1:30 घंटे रुकने के बाद फिर लोकल बस से 30 रुपये देकर वापस बड़ी चौपड़ आ गए। रास्ते से ही जलमहल भी देख लिया, यहीं भी काफी सुंदर जगह है, झील के बीच में बना हुआ महल काफी अच्छा लग रहा था ।कुछ फोटो भी लीजिए। बड़ी चौपड़ वापस आकर यहां से मेट्रो से सिंधी बस स्टैंड आ गया। अब तक शाम के 6 बज चुके थे। होटल में पहुंचे कुछ देर आराम किया। फिर पास में ही लोकल मार्केट में आकार दाल बाटी चूरमा थाली का डिनर किया, यह थाली 149 रुपये की थी। स्वाद ठीक था. अब तक लगभग 9 बज चुके थे। होटल में वापस आकर अब सोने के तयारी करने लगे, पिछली पूरी रात जनरल का सफर और वीडियो बनाने की वजह से ठीक से नींद नहीं आई थी, इसलिए आज जल्दी सोना भी जरूरी था, लगभग 10 बजे सो गए। 

सुबह मैं 7 बजे आंख खुली. वे तो जयपुर में और भी कई जगह हैं घूमने के लिए लेकिन मुझे आज ही वापस नोएडा आना था। इसलिए सुबह चाय और पोहा का नाश्ता जयपुर स्टेशन के पास ही कर लिया । १० बजकर १५ मिनट पर अपनी दिल्ली वापसी की ट्रेन थी, इससे वापस आ गए, आशा करते हैं आपको ये हिंदी ट्रैवल ब्लॉग अच्छा लगा होगा, बाकी यात्रा का वीडियो नीचे है, आप देख सकते हैं, धन्यवाद मिलते हैं एक और नए ट्रैवल ब्लॉग में ..



पार्ट १






वेद वन पार्क नोएडा का सफर

२१ जनवरी २०२४,

दोस्तों कैसे हो आप सब उम्मीद करते हैं अच्छे होंगे | अभी कुछ समय पहले नोएडा में स्थित वेद वन पार्क जाना हुआ | वैसे तो काफी लोग इस पार्क में गए होंगे फिर भी जानकारी के लिए बता दें कि यह पार्क सेक्टर ७८ नॉएडा में है जिसके सबसे पास मेट्रो स्टेशन सेक्टर १०१ है | मैं इस पार्क में अपने बेटे युवान के साथ स्कूटी से गया था | अच्छा पार्क है आप अगर नोएडा या आसपास रहते हैं तो जा सकते हैं | मैंने एक नीचे वीडियो बनाया हुआ है आप लोग देख सकते हैं -