श्री रेणुका जी से नोएडा तक स्कूटी यात्रा ( Sri Renuka Ji to Noida Scooty Trip) Part-2

यात्रा के पिछले देखा की श्री रेणुका झील और मंदिर दर्शन के बाद, मैंने पास में ही होटल ले लिया था | अब आगे ----

कभी-कभी किसी यात्रा का सबसे खूबसूरत हिस्सा मंज़िल नहीं, बल्कि उसकी सुबह होती है।

सुबह के लगभग 6:30 बजे नींद खुली, जब होटल की बालकनी का दरवाज़ा खोला, तो सामने फैली पहाड़ों की हरियाली, हल्की धुंध और उगते सूरज की सुनहरी किरणें किसी पोस्टकार्ड जैसी लग रही थीं। नीचे ददोऊ गांव का  छोटा-सा बस स्टैंड, हिमाचल रोडवेज़ की पहली बस और चारों ओर फैली शांति काफी सुन्दर दृश्य था, जिसे कैमरा कैद तो कर सकता है, लेकिन बिना वहाँ जाये महसूस नहीं किया जा सकता है ।

यही वह पल था जब लगा कि यात्रा का दूसरा दिन भी पहले दिन जितना ही खास होने वाला है।

अक्सर लोग श्री रेणुका झील घूमकर वापस लौट जाते हैं, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि यहां से मात्र 5–6 किलोमीटर की दूरी पर एक बेहद खूबसूरत जगह मौजूद है—जटाम डैम। रास्ता थोड़ा उबड़-खाबड़ था, लेकिन जैसे ही डैम के पास पहुँचे, सारी थकान गायब हो गई। शांत पानी, चारों तरफ पहाड़, उगता हुआ सूरज और दूर पहाड़ी पर दिखता मंदिर—यह दृश्य किसी फिल्म से कम नहीं था।

अगर आप भी श्री रेणुका जी की यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो इस जगह को अपनी सूची में ज़रूर शामिल करें।

यह जानकर राहत मिली कि श्री रेणुका जी जैसे छोटे कस्बे में भी यात्रियों के लिए अच्छी सुविधाएँ उपलब्ध हैं।

  • होटल और होमस्टे आसानी से मिल जाते हैं।
  • पेट्रोल पंप भी मौजूद है।
  • बजट के अनुसार रुकने के कई विकल्प उपलब्ध हैं।

इसलिए यदि आप बाइक या स्कूटी से यात्रा कर रहे हैं, तो रहने या ईंधन की चिंता करने की जरूरत नहीं है।

जब जटाम डैम से वापस आ रहे थे तो रस्ते में ही पेट्रो पम्प पड़ता है, जहाँ से स्कूटी फुल टैंक करा ली | क्योंकि  आज ही वापस नॉएडा भी पहुंचना था |  अब तक सुबह के ८ बज गए थे | इस बार वापस अलग मार्ग  नाहन होते हुए का विचार किया | 

यात्रा का अगला पड़ाव था नाहन

स्थानीय लोगों और अपने अनुभव के आधार पर एक बात स्पष्ट हुई—

यदि आप श्री रेणुका जी जा रहे हैं या वापस आ रहे हैं , तो नाहन वाला मार्ग चुनें।

पहले दिन पांवटा साहिब वाले रास्ते से आने पर सड़कें काफी खराब मिली थीं, जबकि नाहन की ओर जाने वाली सड़कें अधिक आरामदायक और खूबसूरत थीं। रास्ते में हर मोड़ पर पहाड़, घाटियां और जंगल यात्रा को और यादगार बनाते रहे। करीब डेढ़ घंटे बाद नाहन पहुँचना हुआ। यह शहर साफ-सुथरा, व्यवस्थित और शांत लगा। सड़कें अच्छी थीं, ट्रैफिक नियंत्रित था और सुबह का चाय नाश्ता भी यहीं किया गया।

जैसे-जैसे पहाड़ पीछे छूटते गए, रास्ता मैदानों में बदलने लगा। काला अंब, जगाधरी और कुरुक्षेत्र होते हुए यात्रा आगे बढ़ी। आगे  का सफर  काफी आरामदायक रहा। कुछ ही देर में पंजाब और हरियाणा के विशाल गेहूं के खेत दिखाई देने लगे। दूर-दूर तक फैली हरियाली इस बात का एहसास करा रही थी कि भारत का हर इलाका अपनी अलग खूबसूरती समेटे हुए है। 

एक छोटी-सी गलती, जो बड़ी परेशानी बन सकती थी

यात्रा लगभग सामान्य चल रही थी, तभी अचानक स्कूटी बीच रास्ते में बंद हो गई। पहले लगा कि शायद कोई बड़ी तकनीकी खराबी आ गई है, लेकिन पास के मैकेनिक ने इंजन ऑयल चेक किया तो पता चला कि ऑयल लगभग खत्म हो चुका था। किस्मत अच्छी थी  पास  में ही मैकेनिक की शॉप मिल गयी, स्कूटी में इंजन ऑयल बिलकुल बिल्कुल भी नहीं बचा था, सिर्फ ₹300 का इंजन ऑयल डालने के बाद स्कूटी तुरंत स्टार्ट हो गई। उस समय यह एहसास हुआ कि यदि थोड़ी और लापरवाही होती, तो इंजन सीज़ भी हो सकता था।

यह अनुभव हर बाइक और स्कूटी राइडर के लिए एक महत्वपूर्ण सीख है—

लंबी यात्रा से पहले इंजन ऑयल, टायर, ब्रेक और सर्विस की पूरी जांच जरूर करें। 

करनाल में रुककर लंच किया और सिर्फ ₹20 में एक अच्छी चाय पी, जिसने पूरे सफर की थकान कम कर दी। आगे मुरथल के पास गन्ने का रस पीकर एक छोटा-सा ब्रेक लिया। लंबी रोड ट्रिप में ऐसे छोटे विराम सफर को और भी सुखद बना देते हैं। शाम करीब 4:50 बजे नोएडा में प्रवेश हुआ और कुछ ही मिनटों बाद यह लंबी लेकिन यादगार स्कूटी यात्रा अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच गई।

यात्रा से मिली सबसे बड़ी सीख

इस पूरी यात्रा ने सिर्फ नए स्थान नहीं दिखाए, बल्कि कई बातें भी सिखाईं—

  • सुबह जल्दी निकलने का अपना अलग ही आनंद है।
  • मुख्य पर्यटन स्थलों के आसपास छिपी जगहें भी जरूर देखें।
  • पहाड़ों में जल्दबाज़ी नहीं, धैर्य सबसे बड़ा साथी है।
  • वाहन की नियमित जांच लंबी यात्रा के लिए बेहद जरूरी है।
  • सफर का असली आनंद मंज़िल से ज्यादा रास्तों में छिपा होता है।

यदि आप भी श्री रेणुका जी जा रहे हैं, तो ये बातें याद रखें

  • जटाम डैम ज़रूर जाएँ।
  • नाहन वाला मार्ग चुनें।
  • सुबह जल्दी यात्रा शुरू करें।
  • स्कूटी, कार या बाइक का इंजन ऑयल पहले ही चेक कर लें।
  • रास्ते में छोटे-छोटे ब्रेक लेते रहें।
  • प्रकृति का आनंद लें और जंगलों में स्वच्छता तथा आग से सुरक्षा का ध्यान रखें।
आशा करते हैं आपको ये यात्रा सफर अच्छा लगा होगा, मिलते हैं एक और नए सफर साथ |  यात्रा वीडियो नीचे है आप वहाँ से देख सकते हैं-







नोएडा से श्री रेणुका जी झील स्कूटी यात्रा (Noida to Sri Renuka Ji Lake Scooty Trip) Part-1

Part-1

शनिवार (7th March 2026) की सुबह थी। घड़ी में सुबह के 7 बजने वाले थे। मौसम में हल्की ठंडक थी, सूरज धीरे-धीरे आसमान में अपनी रोशनी बिखेर रहा था और मन कई दिनों से पहाड़ों की ओर निकलने को बेचैन था।

काफी समय से ऑफिस और रोजमर्रा की भागदौड़ में फंसे रहने के कारण कोई स्कूटी यात्रा नहीं हो पाई थी। लेकिन आज  सुबह बिना ज़्यादा सोच-विचार के हेलमेट पहना, स्कूटी स्टार्ट की और फैसला कर लिया,

आज मंज़िल होगी हिमाचल प्रदेश की पवित्र "श्री रेणुका जी झील"।

सुबह-सुबह शहर अभी पूरी तरह जागा भी नहीं था। सड़कें लगभग खाली थीं और ठंडी हवा चेहरे से टकराकर एक अलग ही सुकून दे रही थी। सबसे पहले अपनी एक्टिवा स्कूटी में पेट्रोल भरवाया क्योंकि लंबा सफर था और रास्ते में किसी परेशानी का जोखिम नहीं लेना था। फिर सेक्टर 62 से निकलकर NH-24 पर सफर शुरू हुआ। आगे लेफ्ट कट से हाईवे हुए मेरठ जाने वाले एक्सप्रेस वे पर आ गए | तब तक सुबह के लगभग ९ बज चुके थे |  यहीं से असली रोड ट्रिप का एहसास होने लगा। सामने लंबी सड़क, हल्का ट्रैफिक और मन में नई जगह देखने का उत्साह।

मेरठ एक्सप्रेसवे से आगे बढ़ते हुए रास्ता बदलकर गंगा कैनाल रोड की ओर मुड़ गए। यह मार्ग एक्सप्रेसवे जितना चौड़ा भले न हो, लेकिन इसकी सबसे बड़ी खूबी है—कम ट्रैफिक और प्राकृतिक दृश्य। पूरे रास्ते गंगा नहर साथ-साथ बहती रही। कभी चमकता हुआ पानी, कभी हरियाली और कभी छोटे-छोटे गांव। ऐसा लग रहा था जैसे सड़क नहीं, बल्कि प्रकृति के बीच से गुजर रहे हों। हालांकि इस मार्ग पर कई स्पीड ब्रेकर अचानक सामने आ जाते हैं, इसलिए यहां सावधानी से वाहन चलाना बेहद जरूरी है।

रोड ट्रिप का मज़ा तब तक अधूरा रहता है, जब तक किसी ढाबे पर रुककर गरमा-गरम नाश्ता न किया जाए।करीब 10 बजे एक छोटे से ढाबे पर स्कूटी रोकी। सामने ताज़े आलू के परांठे और मिट्टी की खुशबू वाली गर्म चाय।यात्रा में ऐसे छोटे-छोटे पड़ाव ही असली यादें बनाते हैं।

जैसे-जैसे दोपहर होने लगी, सुबह की ठंडक धीरे-धीरे गर्मी में बदलने लगी। सहारनपुर की ओर बढ़ते हुए बड़े-बड़े उद्योग, खेत और शहर की हलचल दिखाई देने लगी। रास्ते में मोबाइल चार्जर होल्डर खराब हो गया। मजबूरी में नया लगवाना पड़ा, जिससे कुछ समय जरूर खराब हुआ, लेकिन लंबी यात्रा में ऐसे छोटे-छोटे अनुभव भी सफर का हिस्सा होते हैं। 

सहारनपुर पार करने के बाद जैसे ही हथनीकुंड बैराज पहुँचे, पूरा दृश्य बदल गया। यमुना नदी पर बना यह विशाल बैराज इंजीनियरिंग का शानदार उदाहरण है। दोनों तरफ फैला पानी, चौड़ी सड़क और शांत वातावरण कुछ देर रुककर इस जगह को महसूस करने पर मजबूर कर देता है। यदि आप इस मार्ग से गुजर रहे हैं, तो यहाँ कुछ मिनट का ब्रेक जरूर लें।

बैराज पार करते ही सड़क जंगलों में प्रवेश करने लगी। कालेश्वर फॉरेस्ट रिजर्व की हरियाली, ऊँचे पेड़ और शांत वातावरण ऐसा एहसास दिलाते हैं जैसे आप किसी नेशनल पार्क के बीच से गुजर रहे हों। रास्ते में "Elephant Crossing Area" का बोर्ड देखकर रोमांच और बढ़ गया। यह पूरा हिस्सा यात्रा का सबसे खूबसूरत और यादगार हिस्सा लगा।

कुछ ही देर बाद वह पल भी आ गया जिसका सुबह से इंतजार था— "Welcome to Himachal Pradesh." सीमा पार करते ही मौसम बदल गया। दूर-दूर तक फैले पहाड़, घुमावदार सड़कें और ठंडी हवा ने सारी थकान खत्म कर दी। 

गूगल मैप भले ही रेणुका जी झील सिर्फ 12 किलोमीटर बता रहा था, लेकिन यह पूरी यात्रा का सबसे चुनौतीपूर्ण हिस्सा निकला। पत्थरों से भरी सड़क, मिट्टी, धूल और कई जगह टूटी हुई रोड। स्कूटी मुश्किल से 15–20 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चल पा रही थी। यही वह पल था जब समझ आया कि पहाड़ दूरी से नहीं, रास्तों से मापे जाते हैं।

शाम करीब 5:30 बजे रेणुका जी झील के पास पहुँच गये | स्कूटी झील परिसर में ही पार्किंग में लगा दी, कोई चार्ज नहीं लगा  | कुछ लोकल लोग यहाँ इवनिंग वाक कर रहे थे |  पहाड़ों के बीच इस झील के शांत पानी का विशाल फैलाव बहुत सुन्दर लग रहा जिन्हे शब्दों में वयां करना मुश्किल है | ऐसा लग रहा था जैसे प्रकृति ने अपने सबसे सुंदर रंग यहीं बिखेर दिए हों। शाम का समय होने के कारण भीड़ भी कम थी और पूरा वातावरण बेहद शांत था। 

श्री रेणुका जी झील परिसर में प्रवेश करते ही महसूस हुआ कि यह सिर्फ एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि आस्था और प्रकृति का अद्भुत संगम है। इस परिसर में झील के साथ और मंदिर भी हैं -

  • माँ रेणुका मंदिर
  • भगवान परशुराम ताल
  • दशावतार मंदिर
  • प्रसाद की दुकानें
  • साफ-सुथरा परिसर

सब कुछ बेहद व्यवस्थित और शांत था।  झील का पानी इतना साफ था कि अंदर तैरती बड़ी-बड़ी मछलियाँ साफ दिखाई दे रही थीं। यहाँ आने वाले श्रद्धालु उन्हें आटा और दाना खिलाते हैं, जो इस जगह के आकर्षण को और बढ़ा देता है। 

पूरे दिन लगभग 400 किलोमीटर से अधिक स्कूटी चलाने के बाद शरीर पूरी तरह थक चुका था। झील के सामने ददऊ गाँव में एक होटल मिल गया। बालकनी वाला साफ-सुथरा कमरा, गीजर, अटैच बाथरूम और पहाड़ों का सुंदर दृश्य— सिर्फ ₹500 में। होटल में ही कुछ देर आराम करने के बाद डिनर किया तब तक ९ बज गए थे, क्यंकि पहाड़ों में बाजार जल्दी ही बंद हो जाते हैं |  दिन भर थकन होने के कारण जल्दी ही नींद आ गयी | उम्मीद करते हैं इस यात्रा का यह पहले भाग आपको पसंद आया होगा, बाकि यात्रा वीडियो नीचे हैं, आप वहां से देख सकते हैं, मिलते हैं जल्द ही अगले भाग में ---



पठानकोट से डलहौजी तक का यादगार सफर (Pathankot to Dalhousie Trip) Part-2

Part 2

पठानकोट जंक्शन पहुँचते ही सबसे पहले स्टेशन के बाहर का नज़ारा देखने लायक था। पहाड़ों की ठंडी हवा और शांत माहौल ने सफर की सारी थकान उतार दी। स्टेशन से बाहर निकलते ही मैं पैदल ही पठानकोट बस स्टैंड की ओर चल पड़ा।

जोगिंदर नगर रेल लाइन का प्लान बदला

मेरा प्लान था पठानकोट–जोगिंदर नगर नैरो गेज रेल लाइन से सफर करने का, लेकिन आगे काउंटर से जानकारी लेने पर पता चला कि यह रेल लाइन पिछले करीब दो साल से बंद है। रेल लाइन बंद होने की वजह से मैंने हिमाचल की ओर निकलने का फैसला किया और डलहौजी जाने का प्लान बना लिया। ऐसे में अब बस से आगे की यात्रा करनी थी।

पठानकोट बस स्टैंड से हिमाचल की ओर

पठानकोट जंक्शन से बस स्टैंड पास ही है और थोड़ी ही देर में मैं वहाँ पहुँच गया। बस स्टैंड पर अलग-अलग डेस्टिनेशन के लिए बहुत सारी बसें खड़ी थीं।

यहाँ से धर्मशाला, शिमला, चंबा, डलहौजी, कांगड़ा और जम्मू जैसे रूट्स के लिए आसानी से बस मिल जाती है। पहली बार आने वालों के लिए यहाँ इन्क्वायरी काउंटर भी मौजूद है।

पठानकोट से बनीखेत तक का सफर

डलहौजी के लिए डायरेक्ट बस नहीं थी, इसलिए पहले बनीखेत तक जाना पड़ा। बनीखेत से डलहौजी लगभग 6–7 किलोमीटर दूर है।

जैसे-जैसे पठानकोट सिटी से बाहर निकले, रास्ते में खूबसूरत पहाड़, शानदार सड़कें और ठंडी हवा सफर को और भी मज़ेदार बना रही थीं। पहाड़ी रास्तों पर यात्रा करने का अलग ही आनंद होता है।

सुबह करीब 8:30 बजे बस चली और लगभग 12:30 बजे हम बनीखेत पहुँचे।

बनीखेत से डलहौजी

बनीखेत पहुँचने के बाद ज़्यादा इंतज़ार नहीं करना पड़ा और डलहौजी के लिए बस मिल गई। रास्ते में मौसम बदलता हुआ लग रहा था, बादल छाए हुए थे और हल्की ठंड महसूस हो रही थी। आख़िरकार हम डलहौजी पहुँच गए।

डलहौजी में होटल और स्टे

बस से उतरकर मैं सुभाष चौक की ओर चला, जहाँ बजट होटल्स आसानी से मिल जाते हैं। यहाँ मुझे होटल न्यू मेट्रो पसंद आया और मैंने यहीं रूम ले लिया। इस होटल का किराया मुझे सिर्फ ₹800 पड़ा, जो सिंगल या डबल स्टे – दोनों के लिए काफ़ी अच्छा है।

डलहौजी की गलियाँ और मॉल रोड

कमरा लेने के बाद मैं बाहर घूमने निकला। सुभाष चौक से मॉल रोड की ओर जाने वाली सड़क बहुत ही सुंदर है।

मॉल रोड डलहौजी का मेन एरिया है, जहाँ शॉपिंग के कई ऑप्शन, खाने-पीने की अच्छी दुकानें है। मॉल रोड से आगे चलते हुए मैं गांधी चौक पहुँचा, जहाँ गांधी जी की प्रतिमा लगी हुई है।

यहाँ मैंने चंबा ढाबा में लंच में आलू का पराठा खाया, जो वाकई बहुत स्वादिष्ट था। अगर आप डलहौजी आएँ, तो यहाँ का आलू पराठा ज़रूर ट्राय करें। गांधी चौक पर लगे बोर्ड से आसपास की जगहों की जानकारी मिल जाती है।यहाँ से खजियार लगभग 22 किलोमीटर दूर है। बसें सुबह के समय मिलती हैं, वरना प्राइवेट टैक्सी लेनी पड़ती है।यहाँ मैंने बाइक और टैक्सी के रेट्स भी पूछे: बाइक/स्कूटर रेंट: ₹1200–1500 प्रति दिन (फ्यूल अलग), टैक्सी (लोकल साइटसीन): लगभग ₹2500 प्रति दिन

डलहौजी एक शांत, खूबसूरत और बजट-फ्रेंडली हिल स्टेशन है। अगर आप फैमिली, दोस्तों या सोलो ट्रैवल कर रहे हैं, तो यह जगह आपको ज़रूर पसंद आएगी।

उम्मीद है मेरी यह ट्रैवल जर्नी आपको पसंद आई होगी। बाकी नीचे पूरा वीडियो है, आप वहां देख सकते हैं कैसा रहा ये सफर..





डलहौजी से खजियार और फिर चंबा होते हुए पठानकोट Part-3

आज मेरी यात्रा का अगला था। सुबह करीब 8:30 बजे मुझे डलहौजी से खजियार के लिए बस मिल गई। होटल से चेकआउट करने के बाद मैं सीधे डलहौजी बस स्टैंड की ओर निकल पड़ा।

सुबह का डलहौजी और सुभाष चौक का नज़ारा

सुबह-सुबह मौसम बिल्कुल साफ़ था। सुभाष चौक से दिखने वाला पहाड़ों का नज़ारा बेहद खूबसूरत लग रहा था। दूर-दूर तक पहाड़ साफ़ दिखाई दे रहे थे और ठंडी हवा चल रही थी।

यहाँ एक अच्छी बात यह है कि डलहौजी के ज़्यादातर मेन होटल्स में पार्किंग की सुविधा होटल की छत पर ही मिल जाती है। अगर आप अपनी गाड़ी से आ रहे हैं, तो पार्किंग की कोई टेंशन नहीं ।

डलहौजी से खजियार की बस यात्रा

खजियार के लिए बस सुबह मिल जाती है। मुझे ₹50 का टिकट मिला और बताया गया कि लगभग 10:00–10:15 बजे तक हम खजियार पहुँच जाएंगे।

रास्ता बहुत ही सुंदर था, लेकिन साथ ही काफी नैरो रोड भी है। अगर सामने से कोई बस या कार आ जाए, तो कई जगहों पर गाड़ी को पीछे करना पड़ता है। फिर भी इस रास्ते का व्यू इतना शानदार है कि सफर अपने आप यादगार बन जाता है।

रास्ते में डलहौजी पब्लिक स्कूल के बच्चे लाइन से स्कूल जाते हुए दिखाई दिए, जो देखने में काफी प्यारा दृश्य था।

करीब 10:20 बजे हम खजियार पहुँच गए। जैसे ही बस से उतरे, सामने दिखा खजियार का फेमस व्यू पॉइंट

खजियार को यूँ ही “भारत का स्वर्ग” नहीं कहा जाता — हरे-भरे मैदान, चारों तरफ जंगलों से ढके पहाड़, ठंडी हवा और खुला आसमान… सब कुछ बहुत ही खूबसूरत था।

नीचे टूरिस्ट के लिए अच्छे होटल, खाने-पीने की शॉप्स और बैठने की जगहें भी मौजूद हैं।

खजियार की प्राकृतिक सुंदरता

खजियार का हरा-भरा मैदान, पीछे फैली हुई पर्वत श्रृंखलाएँ और बीच में बना छोटा-सा तालाब इस जगह को और भी खास बना देता है।
यहाँ आप:

  • नेचर फोटोग्राफी

  • फूलों और रैबिट्स के साथ फोटो

  • फैमिली या फ्रेंड्स के साथ आराम से घूमना

सब कुछ कर सकते हैं।

खजियार कैसे पहुँचे?

अगर आप खजियार आना चाहते हैं, तो ये ऑप्शन हैं:

  • पठानकोट → बनीखेत → डलहौजी → खजियार

  • पठानकोट → चंबा → खजियार

  • कम बजट में: डलहौजी से सुबह की बस (₹50)

  • फैमिली/ग्रुप के लिए: डलहौजी या चंबा से टैक्सी

खजियार में खाने-पीने के ऑप्शन

खजियार में कई छोटी-छोटी दुकानेंहैं।

मैंने यहाँ चाय और आलू का पराठा ऑर्डर किया, जो काफी टेस्टी था। सुबह के नाश्ते के लिए यह एक बढ़िया ऑप्शन है।

हॉर्स राइडिंग और एक्टिविटीज

खजियार में हॉर्स राइडिंग भी अवेलेबल है:

  • शॉर्ट राइड: ₹300 (लगभग 1 किमी)

  • फुल राइड: ₹500 (शिव मंदिर तक)

इसके अलावा यहाँ पैराग्लाइडिंग जैसी एक्टिविटीज की जानकारी भी लोकल लेवल पर मिल जाती है।

अगर आप हिमाचल आ रहे हैं, तो डलहौजी के साथ खजियार जरूर शामिल करें। यह ट्रिप बजट में भी हो जाती है और नेचर लवर्स के लिए परफेक्ट है।

खजियार से चंबा और फिर पठानकोट 

करीब 11:30 बजे खजियार से चंबा होते हुए पठानकोट जाने वाली बस मिल गई। खजियार से चंबा का टिकट ₹50 था।

चंबा शहर पहुँचते ही सामने दिखा रावी नदी, जो शहर के बीचों-बीच बहती है। चंबा हिमाचल का एक मुख्य शहर है और यहाँ से:

  • शिमला

  • पठानकोट

  • भरमौर

  • अन्य बड़े शहरों के लिए बसें आसानी से मिल जाती हैं।

चंबा से पठानकोट की वापसी

वापसी की यात्रा: चंबा से पठानकोट तक का यादगार सफर

नमस्ते दोस्तों, डलहौजी, खजियार और चंबा की खूबसूरत यात्रा के बाद अब मेरी वापसी की यात्रा शुरू हो चुकी थी। चंबा से पठानकोट की ओर निकलते हुए यह सफर भी उतना ही यादगार और अनुभवों से भरा रहा।

रास्ते में मणिमहेश यात्रा के लंगर

जैसे-जैसे बस आगे बढ़ती गई, रास्ते में अगस्त और सितंबर में चलने वाली मणिमहेश यात्रा की वजह से जगह-जगह लंगर लगे हुए दिखाई दिए। शिव भक्तों के लिए लगाए गए ये लंगर न सिर्फ आस्था का प्रतीक हैं, बल्कि यात्रियों के लिए बहुत बड़ी राहत भी होते हैं।

एक जगह बस ड्राइवर साहब ने लंगर के पास बस रोक दी, ताकि यात्री थोड़ा आराम कर सकें और खाना खा सकें। मुझे भी भूख लग रही थी, तो मैंने भी वहीं चावल, दाल, सब्ज़ी और खीर का प्रसाद लिया। खाना बहुत ही स्वादिष्ट था और पूरे मन से परोसा जा रहा था।

बनीखेत तिराहा और रास्तों की जानकारी

रास्ते में बनीखेत तिराहा आता है, जहाँ से: बाईं ओर का रास्ता डलहौजी की ओर जाता है,

एक रास्ता मणिमहेश की ओर जाता है (करीब 110 किमी) और सीधा रास्ता पठानकोट की ओर हमारी बस पठानकोट की ओर बढ़ रही थी। लंच के बाद फिर से यात्रा शुरू हुई। चारों तरफ फैले पहाड़, घुमावदार सड़कें और ठंडी हवा सफर को और भी खास बना रही थीं। कहीं-कहीं बस कुछ मिनटों के लिए रुकी, जहाँ ऊपर से गिरता हुआ पानी और पहाड़ों का नज़ारा देखने को मिला। लगभग दो से ढाई घंटे का और सफर बाकी था। धीरे-धीरे ऊँचाई कम होती गई और पहाड़ों की चोटियाँ पीछे छूटती चली गईं।

शाम करीब 4 बजे के आसपास हम पठानकोट सिटी में एंटर कर चुके थे। कंडक्टर साहब ने बताया कि अब लगभग एक घंटे में हम रेलवे स्टेशन पहुँच जाएंगे। जैसे-जैसे शहर नज़दीक आता गया, पहाड़ी इलाका मैदानी क्षेत्र में बदलता गया। शाम करीब 5:20 बजे हम पठानकोट कैंट रेलवे स्टेशन पहुँच गए। स्टेशन के ठीक सामने आपको रेल कोच रेस्टोरेंट देखने को मिल जाएगा, जहाँ रेलवे कोच के अंदर बैठकर खाना खा सकते हैं। यहाँ अलग-अलग बजट में थाली उपलब्ध है — लगभग ₹180 से ₹300 तक। आप फैमिली, दोस्तों या अकेले भी यहाँ आराम से बैठकर खाना एंजॉय कर सकते हैं।

उम्मीद करता हूँ आपको मेरी यह ट्रैवल जर्नी पसंद आई होगी। और कमेंट में बताइए आपको यह सफर कैसा लगा | फिर मिलेंगे एक नई यात्रा और नए अनुभवों के साथ । बाकी नीचे पूरा वीडियो है, आप वहां देख सकते हैं कैसा रहा ये सफर..

डलहौजी से खजियार





दिल्ली सराय रोहिला से पठानकोट यात्रा Part-1

 नमस्ते दोस्तों,

आज मैं आप सभी के साथ अपनी पिछली ट्रेन  यात्रा शेयर करने जा रहा हूँ, जो मैंने दिल्ली सराय रोहिला से पठानकोट जंक्शन तक की थी। यह सफर न सिर्फ किफायती था, बल्कि अनुभवों से भी भरपूर रहा।

यात्रा की शुरुआत 

यह यात्रा मैंने ऑफिस के बाद शुरू की। नोएडा से मेट्रो के जरिए शास्त्री नगर मेट्रो स्टेशन पहुँचा और वहाँ से ई-रिक्शा लेकर दिल्ली सराय रोहिला रेलवे स्टेशन आ गया।

मेरी ट्रेन थी 14035 धौलाधार एक्सप्रेस, जो रात 11:20 बजे दिल्ली सराय रोहिला से रवाना होती है और सुबह लगभग 8:10 बजे पठानकोट जंक्शन पहुँचाती है।

मैंने इस सफर में जनरल क्लास से यात्रा की, वो भी सिर्फ ₹160 टिकट में।

मैं दिल्ली सराय रोहिला रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 4 पर ट्रेन का इंतज़ार कर रहा था। ट्रेन आने में लगभग दो घंटे का समय था। ट्रेन लगते ही जनरल कोच पूरी तरह भर गया, लेकिन मैं पहले चढ़ गया था, इसलिए मुझे सीट मिल गई।

ट्रेन का रूट और सफर

धौलाधार एक्सप्रेस का रूट थोड़ा अलग है। यह ट्रेन दिल्ली सराय रोहिला → बहादुरगढ़ → जींद → रोहतक → लुधियाना → जालंधर → पठानकोट जंक्शन होते हुए जाती है।

ट्रेन बिल्कुल राइट टाइम चल रही थी। बहादुरगढ़ और जींद जैसे स्टेशनों पर इसका छोटा-सा स्टॉपेज था।

इस ट्रेन में पेंट्री कार की सुविधा नहीं थी, इसलिए अगर आप इस ट्रेन में सफर करने वाले हैं, तो खाने-पीने का सामान पहले से साथ लेकर चलें।

मैंने अपने साथ फ्रूटी, नमकीन, चिप्स, बिस्किट और पानी की बोतल रखी थी, जिससे रात का सफर आराम से कट गया। सुबह के समय ट्रेन लुधियाना और फिर जालंधर कैंट से आगे बढ़ी। रास्ते में पंजाब और पठानकोट के आसपास का नज़ारा देखने लायक था।

करीब 491 किलोमीटर का सफर तय करने के बाद, ट्रेन सुबह 8:10 बजे बिल्कुल समय पर पठानकोट जंक्शन पहुँच गई। मौसम काफी सुहावना था, जिससे यात्रा और भी यादगार बन गई।

सिर्फ ₹160 में इतनी लंबी दूरी की यात्रा करना वाकई में एक शानदार अनुभव रहा।

बाकी नीचे पूरा वीडियो है, आप वहां देख सकते हैं कैसा रहा ये सफर..





जयपुर से दिल्ली का सफर

दोस्तों कैसे हैं आप सब, आशा करते हैं आप सब अच्छे होंगे!

तो पिछले ब्लॉग में आपने देखा कि मैं दिल्ली वापसी के लिए जयपुर स्टेशन आ गया था, वापसी में ट्रेन का मैने तत्काल में स्लीपर से टिकट करा लिया था, लेकिन वीडियो और फोटो की वजह से शीट पर बहुत कम देर बैठना हुआ, बाकी नीचे पूरा वीडियो है, आप वहां देख सकते हैं कैसा रहा ये सफर..



नोएडा से जयपुर का सफर

दोस्तो काफ़ी समय के बाद ये यात्रा व्लॉग लिख रहे हैं, मुझे आशा है कि आप सब अच्छे होंगे। मैं भी अच्छा हूँ,तो चलते हैं अपनी यात्रा सफ़र पर।

आज इस नोएडा से जयपुर के सफर पर चलते हैं, वे तो काफी समय पहले ही तय कर लें कि जयपुर चलते हैं। लेकिन जना आज हुआ. ऑफिस से ड्यूटी करने के बाद शाम को 7:40 बजे बजे सेक्टर 15 नोएडा मेट्रो स्टेशन के पास। हमें दिल्ली कैंट से जयपुर ट्रेन का सफर करना था। पहले से कोई आरक्षण भी नहीं था। इसलिए आज जनरल क्लास से ही जाना था। पहली बार जयपुर जा रहे थे इसलिए मन में अलग ही उत्साह था। फिलाहल 8:35 बजे दिल्ली कैंट रेलवे स्टेशन पहुंच गया। करीब 20 मिनट में जनरल क्लास का टिकट लेकर प्लेटफार्म पर आ गए। 155 रुपये का जयपुर का टिकट ले लिया, ट्रेन यहीं दिल्ली कैंट से ही बनकर चती है, इसलिए आसानी से शीट मिल गई, अपनी ट्रेन 19702 सैनिक एक्सप्रेस थी जो अपने निर्देशित समय रात में 12:07 बजे यहां से चल दी।

यह ट्रेन काफी घूमकर 19 जगह रुकने के बाद सुबह 8:15 बजे जयपुर पहुंचती है। फिलाहल ट्रेन चल दी गुड़गांव, रेवाडी, पटौदी रोड, लोहारू जंक्शन पर ट्रेन फुंची, यहां इस ट्रेन का 30 मिनट का इंतजार है, लोको रिवर्सल होता है, इसी बीच मैंने भी कुछ नास्ता किया। और रात 3:45 बजे ट्रेन चल दी, मुझे पूरी रात वीडियो भी बनाना था इसलिए नींद भी नहीं आ रही थी। कोच में अब तक अच्छी खासी भीड़ हो चुकी थी। ज्यादातर यात्री बाबा खाटू श्याम नगरी, रींगस जा रहे थे।

मेरी साइड में विंडो वाली शीट थी, जिसकी हवा आ रही थी और अच्छा भी लग रहा था। आगे ट्रेन सूरजगढ़, झुंझुनू और नवलगढ़ होते हुए सुबह लगभाग 6:10 बजे सुबह सीकर जंक्शन पहुची। सीकर राजस्थान का एक बड़ा जिला है ! अब तक उजाला भी हो गया था,  अब वीडियो बनाने में और अच्छा लग रहा था। यहां  10 रुपये की चाय पी। यहां से कई यात्री चढ़े और उतरे। अभी भी यहां जयपुर का 2:20 मिनट का सफर बाकी था।

सीकर के बाद होते हुए यह सैनिक एक्सप्रेस ट्रेन सुबह 7:12 मिनट पर रींगस पाहुंची। यहां काफी पैसेंजर्स उतरे और लगभग ट्रेन खाली हो गई। ज्यादातार यात्री बाबा श्याम की नगरी खाटू श्याम जी जा रहे थे। अब तक अच्छा उजाला हो गया था। मैंने भी ट्रेन में ही सुबह ब्रश किया और फिर एक और चाय पी साथ में बिस्किट भी । इसके बाद ट्रेन चोमू सामोद होते हुए आखिर 8:27 बजे जयपुर जंक्शन पहुंच गई। यहां तक ​​आते-आते ट्रेन लगभग 15 मिनट लेट पहुंची।

ट्रेन से उतरे कुछ देर आराम किया फिर प्लेटफार्म नंबर 1 से बाहर निकलते हुए बाहर आ गए। यहां से ऑटो वाले सिंधी कैंप बस स्टैंड, चौपड़ चौपड़ आवाज लगा रहे थे। मैंने तय किया कि पहले सिंधी बस स्टैंड चलते है वहां कोई होटल देखेंगे। 20 रुपए ई रिक्शा वाले को देकर बस स्टैंड पहुंच गए। यहां पास में ही बहुत सारे होटल हैं, आप अपने हिसाब से बजट के अनुसार बुक कर सकते हैं। मैं अकेला था इसलिए डोरमेट्री में ही २०० रुपए में, एक बेड लेकर रेस्ट करने लगा, अगर आप भी अकेले आते हैं तो डोरमेट्री में रुक सकते है!

और यहीं पास में केवल 200 रुपये में 24 घंटे के लिए बिस्तर ले लिया, आखिर मुझे भी बस कुछ देर आराम करके जयपुर ही तो घूमना था। बैग रखकर फ्रेश हुए और  2 घंटे की नींद ली। तब तक 12:30 बज चुके थे । आलमारी में बैग रख कर ताला लगा दिया। पास में ही एक होटल पर आलू प्याज़ परांठे का नाश्ता किया साथ में चाय भी। अब अच्छा लग रहा था. होटल वाले भैया ने बताया यहां आप अगर घूमना चाहते हैं तो  मेट्रो से भी सफर कर सकते हैं। मेट्रो यही सिन्धी बस स्टैंड के पास में ही है। 12 रुपये का मेट्रो का टिकट लेकर बड़ी चौपड़ पहुंच गए. इसी पास में ही हवामहल है, आप चौराहे से पैदल ही जा सकते हैं, हवामहल पहुंचकर कुछ फोटो क्लिक किए, वीडियो बनाएं, कुछ और भाई लोग मिल गए जो सवाई माधोपुर से यहां घूमने आए थे और आमेर किला जा रहे थे। मैं भी उनके साथ हवामहल के बाद आमेर किले के लिए तैयार हो गया। 

30 रुपये लोकल बस से आमेर फोर्ट पहुंचने में लगे। रास्ते में ही जयपुर का मशहूर जलमहल भी दिख गया। करीब २५ मिनट बाद आमेर किले के अंदर पहुंचे, यहां प्रवेश निःशुल्क है। काफ़ी सुंदर यह किला है, काफ़ी अच्छा लग रहा था। फोर्ट पहाड़ी पर होने के कारण ठंडा भी लग रहा था। पास में ही दूसरी पहाड़ी पर किले की दीवार भी दिख रही थी । गाड़ी वाले 250 रुपये में  किले के गेट तक ले जा रहे थे, साथ ही काई ट्रैवल गाइड भी लोगों को इस किले के इतिहास के बारे में बता रहे थे। कुल मिलाकर काफी अच्छा लगा इस आमेर फोर्ट को देखकर, कुछ फोटो लीजिए, वीडियो बनाया.

करीब 1:30 घंटे रुकने के बाद फिर लोकल बस से 30 रुपये देकर वापस बड़ी चौपड़ आ गए। रास्ते से ही जलमहल भी देख लिया, यहीं भी काफी सुंदर जगह है, झील के बीच में बना हुआ महल काफी अच्छा लग रहा था ।कुछ फोटो भी लीजिए। बड़ी चौपड़ वापस आकर यहां से मेट्रो से सिंधी बस स्टैंड आ गया। अब तक शाम के 6 बज चुके थे। होटल में पहुंचे कुछ देर आराम किया। फिर पास में ही लोकल मार्केट में आकार दाल बाटी चूरमा थाली का डिनर किया, यह थाली 149 रुपये की थी। स्वाद ठीक था. अब तक लगभग 9 बज चुके थे। होटल में वापस आकर अब सोने के तयारी करने लगे, पिछली पूरी रात जनरल का सफर और वीडियो बनाने की वजह से ठीक से नींद नहीं आई थी, इसलिए आज जल्दी सोना भी जरूरी था, लगभग 10 बजे सो गए। 

सुबह मैं 7 बजे आंख खुली. वे तो जयपुर में और भी कई जगह हैं घूमने के लिए लेकिन मुझे आज ही वापस नोएडा आना था। इसलिए सुबह चाय और पोहा का नाश्ता जयपुर स्टेशन के पास ही कर लिया । १० बजकर १५ मिनट पर अपनी दिल्ली वापसी की ट्रेन थी, इससे वापस आ गए, आशा करते हैं आपको ये हिंदी ट्रैवल ब्लॉग अच्छा लगा होगा, बाकी यात्रा का वीडियो नीचे है, आप देख सकते हैं, धन्यवाद मिलते हैं एक और नए ट्रैवल ब्लॉग में ..



पार्ट १






वेद वन पार्क नोएडा का सफर

२१ जनवरी २०२४,

दोस्तों कैसे हो आप सब उम्मीद करते हैं अच्छे होंगे | अभी कुछ समय पहले नोएडा में स्थित वेद वन पार्क जाना हुआ | वैसे तो काफी लोग इस पार्क में गए होंगे फिर भी जानकारी के लिए बता दें कि यह पार्क सेक्टर ७८ नॉएडा में है जिसके सबसे पास मेट्रो स्टेशन सेक्टर १०१ है | मैं इस पार्क में अपने बेटे युवान के साथ स्कूटी से गया था | अच्छा पार्क है आप अगर नोएडा या आसपास रहते हैं तो जा सकते हैं | मैंने एक नीचे वीडियो बनाया हुआ है आप लोग देख सकते हैं -





हौज़ खास दिल्ली की छोटी सी यात्रा

 हेलो दोस्तों, कैसे हो आप सब। उम्मीद है सब अच्छे होंगे. काफ़ी समय से इस व्लॉग पर कोई पोस्ट नहीं लिखी।इसी बीच कुछेक यात्राएँ हुई। उन्हीं में से एक यात्रा हौज खास गांव की थी। तो चलिए शुरू करते हैं सफर को। इस सफर पर आज मुझे दिल्ली मेट्रो से जाना था। इसलीये घर से निकल कर 10 रुपये ऑटो वाले भाई को दे कर सीधे मेट्रो सेक्टर 16 पहुंचे। यहां से 40 रुपये का हौज खास का टिकट लिया। नोएडा से हौज खास जाने के लिए अब मुझे सेक्टर 16 से पहले बॉटनिकल गार्डन जाना था। फिर बोटैनिकल से मेट्रो चेंज करके हौज खास, वेसे आप हौज खास किसी भी मेट्रो रूट से भी जा सकते हैं।

वीकेंड होने के कारण मेट्रो में ठीक ठाक भीड़ थी। करीब 1 घंटे मेट्रो का सफर करने के बाद हौज खास मेट्रो स्टेशन पहुंच गए । यहां से ऑटो वाले भाई को 30 रुपये देकर और करीब 5 मिनट बाद आखिरकार हौज खास डियर पार्क और लेक के गेट पर आ गए ।  यहां लोग शाम के समय में ज्यादा आते हैं।  एक कोल्ड ड्रिंक और चिप्स का पैकेट लेकर नास्ता किया फिर गेट से  पहुंचे । अंदर जाने का कोई प्रवेश शुल्क नहीं है | सबसे पहले हौज खास झील देखनी थी,  इसलिए गेट से थोड़ा चलकर बायें हाथ की और मुड़ गए । कुछ दूर चलने के बाद हौज खास झील परिसर में पहुंच गए।



देवप्रयाग से नोएडा वापसी लैंसडौन होते हुए

स्कूटी यात्रा की इस कड़ी में आज देखिये देवप्रयाग से नोएडा वापसी लैंसडौन होते हुए की वीडियो | 


देवप्रयाग से लैंसडौन 

                                                



नोएडा से देवप्रयाग स्कूटी यात्रा वीडियो

कैसे हैं आप सब, आशा करते हैं सब ठीक होंगे |  आज मेरी फरबरी २०२१ में नोएडा से देवप्रयाग तक की स्कूटी यात्रा के वीडियो का आनंद लीजिये | 


नोएडा से हरिद्वार 


हरिद्वार से देवप्रयाग






नोएडा से शाहजहांपुर स्कूटी यात्रा Noida to Shahjahanpur trip by Scooty

दिनाँक :१५ नवम्बर २०१९ (शुक्रवार ) 
Date : 15 November  2019 (Friday )


आज काफी समय बाद पोस्ट लिख़ने का मौका मिला | यात्रा किये हुए काफी समय हो गया है लेकिन यादें आज भी ताजा हैं | यह स्कूटी यात्रा १५ नवम्बर को की गयी थी | १७ सितम्बर को मेरे बेटे का मुंडन था | मेरी पत्नी और सुपुत्र जी hometown में थे | मैं यहाँ नोएडा में अकेला था | मन में विचार आया क्यों न इस बार घर जो की 3७८ किलोमीटर पड़ता है  स्कूटी से जाकर देखा जाये | हालांकि मै पहले भी हरिद्वार तक स्कूटी यात्रा कर चुका था जिसमे मैंने वापसी तक ५०० किलोमीटर से ज्यादा स्कूटी चलायी थी  |  इसलिए थोड़ा आत्मविस्वास था की घर जा सकते हैं | बहुत से लोगों ने स्कूटी से काफी लम्बी यात्राएं की हैं तो एक बार चलकर देखते हैं | 

नाईट ड्यूटी करने के बाद सुबह ४ बजे रूम पर आ गए | नींद तो आ रही थी लेकिन कंट्रोल करना जरुरी था क्यूंकि आज ही घर भी पहुंचना था | तो बैग पैक किया और ५:३५ बजे सुबह स्कूटी स्टार्ट करते ही इस सफर की शुरुआत हो गयी | सर्दियों का मौसम होने के कारण अभी अँधेरा भी था और ठंडक भी | फिलहाल चिंता की कोई बात नहीं मैं हेलमेट , ग्लव्स के साथ में पर्याप्त सर्दियों के कपड़ों में पैक था | चलते हुए सबसे पहले नींद ना आये इसलिए सेक्टर ६१ मेट्रो स्टेशन नॉएडा के पास ही एक चाय की दुकान पर चाय पी और एक परांठे का नास्ता भी कर लिया | अंडरपास से होते हुए सुबह ६ बजे NH -२४ पर में सेक्टर ६२ के पास था | स्कूटी में एक दिन पहले ही टैंक फुल करा लिया था | ६०-६५ की स्पीड से चलते हुए ७:१५ बजे हापुड़ बाय पास पहुँच गए | तब तक हल्का उजाला हो गया था | आगे चलते हुए  गढ़ मुक्तेशवर के पास एक ढाबे पर पहला ब्रेक लिया | यहाँ सरकारी बसें भी रुकती हैं | चाय और ब्रेड पकोड़ा खाकर घर पर भी बता दिया कि स्कूटी से आ रहे हैं ३-४ बजे तक पहुँच जायेंगे | 

यात्रा मैप 


देहरादून और मसूरी यात्रा, उत्तराखण्ड Trip to Dehradun and Mussorie, Uttarakhand

दिनांक: २२-२३ सितम्बर २०१९         

देहरादून और मसूरी यात्रा का प्रोग्राम भी अचानक ही यात्रा से २-३ दिन पहले ही बना |  २३ सितम्बर को मेरे बेटे का जन्मदिन होता है | इस वर्ष  दूसरा जन्मदिन था | १९  सितम्बर को मेरी पत्नी जी से जन्मदिन मनाने के बारे में चर्चा हो रही थी इसी बीच  उन्होंने बताया कि उनके छोटे भाई यानि की मेरे छोटे साले जी विपुल भी कल नोएडा आ रहे हैं | बातों ही बातों में कब  देहरादून और मसूरी यात्रा का प्रोग्राम बन गया पता ही नहीं चला |



21 सितम्बर को नाईट ड्यूटी करने के बाद  ४ बजे रूम पर आ गए |  सुबह 7:00 बजे के आसपास गाजियाबाद से देहरादून शताब्दी ट्रेन थी जिससे हम लोगों को देहरादून जाना था |  सुबह कैब से  गाजियाबाद रेलवे स्टेशन पर 6:00 बजे आ गए | 

स्कूटी यात्रा - नोएडा से हरिद्धार- मुरादाबाद होते हुए नोएडा वापसी Noida to Haridwar and return trip by Scooty

दिनांक : २६ से २८ मई २०१९ 

सभी ब्लॉग मित्रों को नमस्कार, काफी समय हो गया था ब्लॉग पर कोई यात्रा लेख लिखे हुए | अभी अप्रैल माह में नयी होंडा एक्टिवा 5G  स्कूटी खरीदी | तब से मन में कही जाने का विचार चल रहा था | लेकिन समय ना मिलने के कारण कहीं जाना नहीं हो सका |  आखिरकार २९ मई को परिवार में शादी समारोह की वजह से सप्ताहांत  समेत छुट्टियाँ मिल गयी | इसी समय मैने नोएडा से मेरठ होते हुए हरिद्धार और फिर हरिद्धार से नजीबाबाद, मुरादाबाद होते हुए नोएडा वापसी का प्लान बनाया | हालाँकि स्कूटी से यह सफर ज्यादा ही कहना चाहिए लेकिन चलो चलते है | 



शनिवार २५ मई रात्रि ऑफिस करने के बाद २६ को रूम पर वापस आकर कुछ देर विश्राम किया और सुबह निर्धारित ५ बजे इस यात्रा की शुरुआत कर दी |

छोटा हरिद्वार : बृजघाट, गढ़ मुक्तेस्वर यात्रा (उत्तर प्रदेश )

१६ जनबरी २०१८ , मंगलवार 


इस नए साल यात्रा की शुरुआत उत्तर प्रदेश के छोटा हरिद्वार और आस्था के संगम गंगा जी के किनारे स्थित बृजघाट, गढ़ मुक्तेस्वर से हुई | १६ जनबरी २०१८ को मौनी अमावस्या का शुभ दिन होने के कारण यहाँ जाना निश्चित हुआ | वैसे तो यह स्थान मेरे घर जाने के रास्ते में बीच में ही पड़ता है लेकिन कभी जाना नहीं हो पाया | चलिए आज चलते हैं | १५ जनवरी को नाईट शिफ्ट करने के बाद सुबह फ्री हुए | रूम पर थोड़ा आराम करने के बाद सुबह ठीक ५:३० बजे ऑटो पकड़ कर सीधे सेक्टर ६२ पहुंचे | फिर यहाँ से शेयर्ड ऑटो से २० मिनट बाद आनंद विहार बस स्टेशन , दिल्ली पहुँच गए | तब तक सुबह हो गयी थी और ६:३० बजे समय हो गया था | बृजघाट, गढ़ मुक्तेस्वर जाने के लिए बसें आनंद विहार बस स्टेशन, दिल्ली से मिलती हैं | दिल्ली लखनऊ हाइवे पर स्थित होने के कारण यहाँ आप बरेली , मुरादाबाद , लखनऊ या फिर सीधे गढ़ मुक्तेस्वर जाने वाली बस से पहुँच सकते हैं | दिल्ली से बृजघाट, गढ़ मुक्तेस्वर ९४ किलोमीटर है | २-३ घंटे में आसानी से पहुंचा जा सकता है | मुझे मुरादाबाद जाने वाली बस मिल गयी | ११६ रुपये का टिकट लेकर बस में आगे ही खिड़की वाली शीट मिल गयी | मोहननगर ,गाज़ियाबाद , हापुड़ बाईपास होते हुए बस रास्ते में गढ़ मुक्तेस्वर से पहले एक सरकारी ढावे पर चाय, नास्ते के लिए रुकी | 

करीब २० मिनट बाद बस चल दी फिर यहाँ से चलकर ९:४० बजे सुबह बृजघाट, गढ़ मुक्तेस्वर पहुँच गए | मौनी अमावस्या का दिन होने के कारण इस पावन तीर्थ स्थान पर भीड़ भी अधिक थी और मेला लगा हुआ था | गंगा नदी के किनारे स्थित होने के कारण इस स्थान की पौराणिक मान्यता है | यहाँ पर भी हरिद्वार की तरह ही घण्टाघर गंगा नदी के किनारे बना हुआ है जिसमे एक विशाल घड़ी लगी है | मुझे सबसे पहले स्नान करना था इसलिए टहलते हुए थोड़ा दूर गंगा घाट के किनारे पहुंचे | स्नान पूजा इत्यादि करने के बाद कुछेक फोटो भी लिए | कुछ नाव वाले लोगों को ५० रुपये प्रति चक्कर के हिसाब से बोटिंग भी करा रहे थे | कई जगह पर धार्मिक कार्य , हवन और भंडारा इत्यादि चल रहा था | माँ गंगा के चरणों में इस पावन स्थान पर चारो और भक्तिमय वातावरण था | सुबह का समय होने के कारण मौसम भी काफी अच्छा हो गया था | गंगा घाट से बहार आकर एक होटल पर चाय जलपान किया फिर कुछ देर बाजार में टहलते रहे | तब तक भूख भी लगने लगी थी | एक होटल पर लंच किया | घड़ी में दोपहर के १ बज चुके थे | कुछेक फोटो लिए | अब वापसी का समय था | थोड़ा सा ऊपर चलकर ही ऊपर हाइवे से दिल्ली जाने वाली बस मिल गयी |  बस से ४ बजे तक रूम पर वापस पहुँच गए |

चलिए अब एक नजर यात्रा चित्रों पर :-


बर्ष 2017 में की गयीं यात्राओं का लेखा जोखा

सबसे पहले सभी bolg मित्रों को आगामी क्रिसमस और नववर्ष की हार्दिक शुभकामनायें | बर्ष 2017 यात्राओं के लिहाज से ठीक ही रहा हालाँकि पारिवारिक परिस्थितियों और पुत्र रत्न की प्राप्ति की वजह से ज्यादा तो नहीं लेकिन २०१६ की तरह कुछ यात्रायें इस बर्ष भी हुईं | जिनका संछिप्त विवरण इस प्रकार है-

साल २०१७ की पहली यात्रा जनवरी माह में ही भारतीय रेल संग्रहालय, नई दिल्ली की हुई यह यात्रा २८ जनवरी को की गयी | अचानक ही सप्ताहांत पर जाने का अवसर प्राप्त हुआ | १ दिन की यह यात्रा शानदार रही और भारतीय रेल के बारे में और जानकारी प्राप्त हुई | 

कुछ यात्रा वीडियो

सबसे पहले सभी मित्रों को जन्माष्टमी एवं  स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाये | काफी दिनों से इच्छा थी कुछ यात्रा वीडियो पोस्ट करने की | चलिए  देहरादून यात्रा, शिमला यात्रा , दिल्ली ज़ू और नॉएडा स्टेडियम से सम्बंधित कुछ वीडियो है | आप भी देखिये और अपनी राय बताइये |

                                             
                                                                    द रिज रोड शिमला 



                                                                 सहस्त्रधारा , देहरादून 


हिमाचल की ओर - शिमला यात्रा Toward Himachal - Shimla Yatra



दिनांक : १६ जुलाई                                                                                                                                                                                         वैसे तो काफी दिनों से हिमाचल जाने के बारे में सोच रहा था | माँ वैष्णो देवी यात्रा के दौरान किसी कारण बश जाना नहीं हो सका |  लेकिन आखिरकार आज इस हिमाचल में शिमला यात्रा पर मुहर लग ही गयी | शनिवार की नाईट ड्यूटी करने के बाद सुबह तक यहाँ जाने का कोई इरादा नहीं था |  रविवार और सोमवार को मेरा साप्ताहिक अवकाश रहता है और मंगलवार को सांयकालीन ड्यूटी थी इसलिए काफी समय था | तो फिलहाल रविवार को दोपहर में भोजन करने के बाद अपना बैग पैक किया और रूम से सांय को ४:३० बजे नॉएडा सेक्टर १५ पहुंचे | चूँकि पहले से मेरा ना तो बस से ही और ना ही ट्रैन से शिमला जाने का रिज़र्वेशन था | वैसे अगर हिमाचल के किसी भी शहर जाना हो तो बसें  कश्मीरी गेट बस अड्डे से आसानी से मिल जाती हैं | करीब १:३० घंटे बाद ६:०० बजे दिल्ली स्थित कश्मीरी गेट बस अड्डे पहुँच गए | 

उग्रसेन की बावली, दिल्ली Ugrsen Ki Baoli, Delhi

दिनांक : ९ अप्रैल                                                                                    
अभी कल ऐसे ही दिल्ली में कम चर्चित लेकिन बावली में उत्कृष्ट उग्रसेन की बावली, दिल्ली जाना हुआ | यहाँ तक पहुंचना वेहद आसान है | वैसे तो ज्यादातर लोग पहले भी यहाँ गए होंगे लेकिन फिर भी जानकारी के लिए बताते चलें कि यहाँ पहुंचने के लिए निकटतम मेट्रो स्टेशन बाराखंभा रोड है जो राजीव चौक से ठीक पहले दिल्ली मेट्रो की ब्लू लाइन यानि की नॉएडा सिटी सेण्टर से द्वारका जाने वाली लाइन पर है | उग्रसेन की बावली बाराखंभा रोड  मेट्रो स्टेशन से महज ५०० मीटर ही है और आप आसानी से पैदल भी जा सकते हैं  | दिल्ली के अन्य स्थानों की तरह उतनी प्रसिद्ध तो नहीं लेकिन हाँ एक बार देखने योग्य है | चलिए अब कुछ फोटो के माध्यम से इस यात्रा की जुवानी :-


एक बार फिर ऋषिकेश और सहस्त्रधारा,देहरादून यात्रा

दिनांक : १ अप्रैल                                    दिन : शनिवार





वैसे तो पहले से ही इस यात्रा पर जाने का मन था लेकिन किसी ना किसी वजह से जाना नहीं हो पाया ।  आखिरकर इस सफर की सुरुआत शनिवार को ग़ाज़ियाबाद से चलने वाली ट्रैन के साथ हो ही गयी । वैसे तो इस सप्ताह मुझे शुक्रवार को ही चलना चाहिए था लेकिन अंतिम समय पर निर्णय लेने के कारण ऐसा हुआ । चलिए कोई नहीं एक दिन देर सही । शनिवार दोपहर को लेटे हुए ही आखिरकर देहरादून जाना निश्चित हो गया क्योंकि ऋषिकेश तो एक बार पहले भी नीलकंठ महादेव मंदिर जाते समय जा चुका था । तो बेग पैक करके शनिवार सांय ४ बजे रूम से निकल गए । नॉएडा होने की वजह से मेरे यहाँ से ग़ाज़ियाबाद रेलवे स्टेशन पास पड़ता है । ऑटो किया और ५:२० बजे ग़ाज़ियाबाद स्टेशन पहुँच गए । दिल्ली से ऋषिकेश जाने वाली ट्रेन का यहाँ पहुँचने का समय ६ बजकर २५ मिनट था । फिलहाल ५ मिनट की देरी से ट्रैन आयी । लोकल ट्रेन होने की वजह से ज्यादातर यात्री मोदीनगर, मेरठ या फिर मुज्जफरनगर के ही थे । कम ही यात्री हरिद्वार और ऋषिकेश जा रहे थे । ऊपर की शीट मिल गयी । ट्रैन चल दी और ८ बजे मेरठ पहुंची । थोड़ा सा नास्ता किया और चाय पी । उसके बाद फिर धीरे धीरे नींद आने लगी ।